दरभंगा , दिसंबर 05 -- डॉ. एच बिजयेंद्र ने शुक्रवार को कहा कि यदि किसी व्यक्ति की सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है, तो इसे उम्र का असर मानकर न छोड़ें और इएनटी विशेषज्ञ से जांच अवश्य कराएँ।
डॉ. एच बिजयेंद्र ने मिथिलांचल कान नाक गला संस्था द्वारा आयोजित 49वें तीन दिवसीय बीजेएआईओ 2025 के प्रथम दिन संवादात्मक सत्र में कहा कि स्टेपेडेक्टोमी एक सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी सर्जरी है जो ओटोसक्लेरोसिस से होने वाली सुनने की समस्या का स्थायी समाधान देती है। उन्होंने कहा कि स्टेपेडेक्टोमी कान की एक नाज़ुक सर्जरी है, जो ओटोसक्लेरोसिस नामक बीमारी में की जाती है।इस बीमारी में कान की एक छोटी हड्डी स्टेपेस जाम हो जाती है, जिससे आवाज़ ठीक से अंदर नहीं पहुंचती और धीरे-धीरे सुनाई देना कम हो जाता है।
डॉ. एच बिजयेंद्र ने बताया कि कोलेस्टियाटोमा कान के बीच वाले हिस्से (मिडिल ईयर) में बनने वाली त्वचा की असामान्य थैली या गांठ होती है।यह कोई कैंसर नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर कान की हड्डियों को नुकसान पहुँचा सकती है और सुनने की क्षमता कम कर सकती है। यह एक गंभीर लेकिन पूरी तरह ठीक होने वाली समस्या है, यदि समय पर पहचान कर और उचित सर्जरी कराई जाए।लंबे समय तक कान बहना या सुनाई कम हो तो इसे अनदेखा न करें।
पुणे से आए डॉक्टर विकास कुलकर्णी ने बताया कि राइनोसेप्टोप्लास्टी एक ऐसी सर्जरी है जिसमें नाक का आकार और नाक के अंदर की तिरछी हड्डी (सेप्टम) दोनों को एक साथ ठीक किया जाता है। यह सर्जरी न सिर्फ सांस लेने में सुधार करती है बल्कि नाक को संतुलित और आकर्षक आकार भी देती है।
सत्र के दौरान कई चिकित्सकों ने वरिष्ठ चिकित्सकों से शल्य क्रिया के विभिन्न आयामों पर चर्चा भी की।
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश भर के 700 से अधिक चिकित्सको ने पंजीकरण कराया है और अपने ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
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