जौनपुर , जनवरी 27 -- ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव एवं प्रवक्ता मौलाना डॉ. यासूब अब्बास ने मंगलवार को कहा कि देश में कानून से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं है। चाहे वह शंकराचार्य हों, मौलाना हों, मौलवी हों या किसी भी धर्म के गुरु, सभी को कानून के दायरे में रहकर ही कार्य करना चाहिए।

जौनपुर नगर के सिपाह मोहल्ले में मरहूम सैयद मुंसिफ हुसैन की मजलिस-ए-चेहल्लुम में शिरकत करने पहुंचे मौलाना डॉ. यासूब अब्बास ने पत्रकारों से बातचीत में प्रयागराज माघ मेले का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य के साथ हुई कथित घटना पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा माफी मांगे जाने के बाद इस विषय को वहीं समाप्त कर देना चाहिए।

उन्होंने वक्फ बोर्ड में कथित धांधलियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वक्फ संशोधन बिल को जल्दबाजी में पारित किया गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि यह कानून वक्फ के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि 'उम्मीद पोर्टल' पर वक्फ संपत्तियों का सही विवरण दर्ज नहीं हो पा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा है और संपत्तियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। इस कानून पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

मौलाना डॉ. यासूब अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में लैपटॉप होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस सोच को जमीन पर उतारने की जरूरत है। यदि सरकार मुस्लिम समाज के शैक्षणिक और सामाजिक उत्थान को लेकर गंभीर है, तो उसे ठोस कदम उठाने होंगे ताकि शिक्षा, पारदर्शिता और कानून का राज सभी के लिए समान रूप से लागू हो सके।

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