पटना , जनवरी 03 -- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि कानून का लाभ केवल उन लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए जो आर्थिक रूप से इसे वहन कर सकते हैं, बल्कि यह उन लोगों के दरवाज़े तक भी पहुँचना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।बिहार की राजधानी पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए न्यायधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानून सिर्फ उन्हीं के लिए नहीं है जो आर्थिक रूप से इसे वहन कर सकें, बल्कि इसका लाभ हर उस व्यक्ति को मिलना चाहिए, जिसे इसकी जरूरत है। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि कोई विधि स्नातक कानून की पढ़ाई करता है बल्कि यह ज्यादा मायने रखता है कि इसकी पढ़ाई के बाद क्या वह न्याय से उन समुदायों की मदद करता है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है।

मुख्य न्यायाधीश ने दीक्षांत समारोह में उनके हाथों उपाधि प्राप्त कर रहे युवा विधि स्नातकों से कहा कि चाहे आप वकालत, लोक सेवा, शिक्षण या कोई अन्य मार्ग चुनें, इस तथ्य को कभी न भूलें कि कानून अपनी वैधता उन लोगों से प्राप्त करता है, जिनकी वह रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि जब आप अपनी क्षमताओं का उपयोग अनसुनी आवाज़ों को स्वर देने और उपेक्षितों को गरिमा प्रदान करने में करते हैं, तो आप न केवल अपनी शिक्षा बल्कि संविधान का भी सम्मान करते हैं।

सीजेआई ने युवा विधि स्नातकों से अपने पेशेवर जीवन में अपने सहपाठियों और वरिष्ठों से मिले मूल्यों और ज्ञान को ध्यान में रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पेशे विविध हो सकते हैं और कभी-कभी अप्रत्याशित भी, लेकिन कक्षा में मिली शिक्षा को सदैव स्मरण में रखना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल को भी याद किया, जब एक युवा वकील अत्यंत निष्ठा से लड़े गए एक मामले के खारिज होने के बाद उनसे मिलने आया था। उस वकील को गहरी निराशा हुई थी और वह अत्यंत हताश था।

न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनकी सलाह और प्रोत्साहन पर उस युवा वकील को उच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिला और बाद में फैसला उसके पक्ष में आया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक असफलता प्रायः अंतिम निर्णय नहीं होती। अक्सर एक जगह ठहरने के बाद सीखने तथा नए संकल्प के साथ लौटने का अवसर मिलता है।

न्यायाधीश सूर्यकांत आज पटना के समीप पुनपुन प्रखंड के पोठही गांव भी गये जहां उन्होंने बिहार न्यायिक अकादमी के शिलान्यास किया।

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