कानपुर , मार्च 10 -- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को घुटनो पर बैठाने का प्रतीक ऐतिहासिक गंगा मेला मंगलवार को रंगों से सजे ठेलों और अबीर गुलाल उड़ाती मस्त टोलियों के बीच शुरु हो गया।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने हटिया के ऐतिहासिक रज्जन बाबू पार्कमें झंडारोहण कर गंगा मेला की शुरुआत की और शहरवासियों को गंगा मेले की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान रंगों से सजे ठेलों के साथ टोलियां निकलीं और पूरे उत्साह के साथ गंगा मेले का आयोजन प्रारंभ हुआ। जिलाधिकारी कानपुर ने कहा कि गंगा मेला शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे आपसी भाईचारे और उत्साह के साथ मनाया जाता है। जो कानपुर की पहचान है, उन्होंने सभी शहरवासियों से अपील की कि वे मेले को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं। इस अवसर पर एमएलसी सलिल विश्नोई, विधायक अमिताभ बाजपेई, हास्य कलाकार अनु अवस्थी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कानपुर में अनुराधा नक्षत्र में होली खेलने की परंपरा दशकों पुरानी है और यह परंपरा आजादी की लड़ाई से जुड़ी है। इतिहासकारों के अनुसार गंगा मेला के नाम से मशहूर इस परंपरा की नींव 1942 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पड़ी थी जब कानपुर के हटिया बाज़ार में अंग्रेजों ने होली खेलने पर पाबंदी लगा दी थी। अंग्रेज अधिकारी मिस्टर लुईस ने पाबंदी के बावजूद होली खेलने के आरोप में 45 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को गिरफ्तार कर लिया था, क्योंकि उन्होंने होली के दिन तिरंगा फहराया था।
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