नैनीताल , जनवरी 21 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सहायक अध्यापक पद के लिए चल रही काउंसिलिंग में देरी से पहुंचने पर याचिकाकर्ता को मानवीय आधार पर राहत देते हुए चंपावत के जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को उनकी काउंसिलिंग कराने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता भावना उप्रेती के मामले पर बुधवार को सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने ये निर्देश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रदेश में सहायक अध्यापक के पदों की भर्ती के लिए जिला स्तर पर काउंसलिंग चल रही है। विगत 12 जनवरी को चंपावत जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) के कार्यालय में उसकी काउंसिलिंग तय थी लेकिन वह काउंसिलिंग के लिए एक घंटा देरी से पहुंची।

इसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने उसकी काउंसिलिंग में शामिल करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि 74 प्रतिशत तक अंक पाने वालों को काउंसलिंग में शामिल किया गया जबकि उसके 74.4 प्रतिशत अंक थे। यदि उसे काउंसिलिंग में शामिल किया जाता तो उसका चयन सहायक अध्यापक पद पर हो सकता था।

अदालत ने याचिकाकर्ता के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए चंपावत के जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को याचिकाकर्ता की काउंसिलिंग कराने के निर्देश दिए हैं और याचिकाकर्ता को आगामी 24 जनवरी को जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में 11 बजे उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

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