जयपुर , जनवरी 04 -- राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डा प्रेमचंद बैरवा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अम्बेडकर पीठ को लेकर दिए बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही इस पीठ की पांच वर्ष की अवधि का एमओयू समाप्त हो गया था। इसे आगे बढ़ाने की उन्हें चिंता करनी चाहिए थी।

डा बैरवा ने रविवार को अपने बयान में अंबेडकर पीठ के बारे में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार संविधान निर्माता डा भीमराव अम्बेडकर के नाम से पीठ की स्थापना वर्ष 2016 में अम्बेडकर फाउण्डेशन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भारत सरकार एवं राजस्थान विश्वविद्यालय के मध्य हुए एमओयू के तहत हुई थी। यह एमओयू 12 अप्रेल 2016 से वर्ष 2021 अर्थात् पांच वर्ष तक की अवधि के लिए प्रभावी था।

उन्होंने श्री गहलोत के बयान का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री इस संबंध में भ्रम ना फैलाएं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही इस पीठ की पांच वर्ष की अवधि का एमओयू समाप्त हो गया था। इसे आगे बढ़ाने की उन्हें चिंता करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में अम्बेडकर पीठ के संबंध में इनकी उदासीनता और लापरवाही के कारण इस पीठ को मिलने वाला निश्चित वित्तीय अनुदान कभी पूरा नहीं मिल पाया था। उन्होंने कहा कि श्री गहलोत को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि श्री गहलोत ने अपने बयान में कहा था कि राजस्थान विश्वविद्यालय में डा अम्बेडकर के नाम पर स्थापित पीठ का केन्द्र सरकार द्वारा बंद करना और प्रशासन का इस बारे में बेखबर होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षा के मंदिर में बाबा साहेब के नाम पर बनी पीठ की ऐसी दुर्दशा और घोर लापरवाही अक्षम्य है।

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