नयी दिल्ली , जनवरी 03 -- कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक अभियान की घोषणा करते हुए शनिवार को कहा कि वह 45 दिन के देशव्यापी आंदोलन 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की शुरुआत आठ जनवरी से करेगी।
यह अभियान 25 फरवरी तक चलेगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि हाल में लागू किया गया वीबी-जी राम जी अधिनियम काम के कानूनी अधिकार को चुपचाप खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि यह कानून सत्ता के विनाशकारी केंद्रीकरण का प्रयास है। यह दुनिया की सबसे बड़ी गरीबी उन्मूलन योजना को कमजोर करता है।
कांग्रेस नेताओं ने नए कानून के कई प्रावधानों को खतरनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, अधिकारों का केंद्रीकरण होगा और मजदूरी दबाई जाएगी। पार्टी के अनुसार पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का सौ प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि अब 60:40 का फार्मूला लागू कर राज्यों को 40 प्रतिशत राशि अपने बजट से देनी होगी।
श्री जयराम रमेश ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्य को अब अपने संसाधनों से चार हजार करोड़ रुपये जुटाने पड़ेंगे, जो संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून मांग आधारित योजना की जगह केंद्र द्वारा तय 'सूचित' पंचायतों की व्यवस्था लाता है, जिससे अधिकार सरकार की अनुमति में बदल जाता है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मजदूरी और महंगाई के बीच संबंध खत्म कर दिया गया है। अब कोई राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी दर नहीं होगी और पंचायतवार दरें तय की जाएंगी, जिससे कम भुगतान और ग्रामीण संकट बढ़ने की आशंका है। पार्टी ने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गांधी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के प्रतीक थे।
अभियान के तहत आठ जनवरी को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालयों में तैयारियों की बैठकें होंगी। इसके बाद 10 जनवरी को जिलों में प्रेस वार्ताओं के जरिए आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। गांधी या आंबेडकर प्रतिमाओं के पास 11 जनवरी को एक दिन का उपवास रखा जाएगा। इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपालें होंगी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों एवं श्रमिकों को सौंपे जाएंगे।
वार्ड और ब्लॉक स्तर पर 30 जनवरी को शांतिपूर्ण धरने, 31 जनवरी से छह फरवरी तक जिला कलेक्टर कार्यालयों पर धरने और सात से 15 फरवरी तक विधानसभा या राजभवन के बाहर राज्य स्तरीय प्रदर्शन होंगे। इसके बाद 16 से 25 फरवरी के बीच चार बड़े क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित कर अभियान का समापन किया जाएगा।
कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है और विपक्ष शासित राज्यों के साथ मिलकर इस कानून के खिलाफ संयुक्त रुख अपनाएगी।
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