पुणे , अप्रैल 04 -- कांग्रेस ने शनिवार को यह स्पष्ट किया कि भारत में नक्सलवाद में आयी कमी का श्रेय केवल वर्तमान मोदी सरकार को नहीं दिया जा सकता। पार्टी ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों ने इस विद्रोह पर अंकुश लगाने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल दादा तिवारी ने एक बयान में इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए उन्हें 'अपरिपक्व, अहंकारी और बहकाने वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई दशकों से चली आ रही है और इसमें कांग्रेस के कई नेताओं ने माओवादी हमलों में अपनी जान गंवाकर बलिदान दिया है।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री तिवारी ने बताया कि 2004 से 2013 के बीच 2,160 नक्सली मारे गये थे, जबकि 2014 से 2025 के बीच यह संख्या 2,088 रही। उन्होंने तर्क दिया कि यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कांग्रेस नीत यूपीए शासन के दौरान अधिक आक्रामक अभियान चलाये गये थे।

श्री तिवारी ने आगे कहा कि नक्सलवाद में कमी काफी हद तक यूपीए सरकार की लागू की गयी नीतियों के कारण हुई। इसमें हथियारों की आपूर्ति शृंखला को तोड़ना, संचार नेटवर्क को ब्लॉक करना और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल था।

उन्होंने आदिवासी समुदायों का विश्वास जीतने के लिए सड़क निर्माण, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने वन अधिकार अधिनियम (2006) और भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) जैसे प्रमुख कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन उपायों ने आदिवासी आबादी को सशक्त बनाया और नक्सलवाद की ओर उनके झुकाव को कम किया।

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