बेंगलुरु , मार्च 22 -- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए दावणगेरे साउथ सीट से श्री समर्थ मल्लिकार्जुन को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस फैसले से पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि अल्पसंख्यक नेताओं की मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, कई अल्पसंख्यक नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर दावणगेरे साउथ में बढ़ते अल्पसंख्यक वोट बैंक का हवाला देते हुए मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देने की मांग की थी। वहीं वरिष्ठ नेता जमीर अहमद खान ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि मुस्लिम नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो वे इस्तीफा दे सकते हैं।
हालांकि, तमाम दबाव के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने श्री समर्थ मल्लिकार्जुन पर भरोसा जताया। श्री समर्थ, वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते हैं और इस फैसले के साथ शमनूर परिवार की तीसरी पीढ़ी की राजनीति में औपचारिक एंट्री हो गई है। यह सीट श्री शिवशंकरप्पा के निधन से खाली हुई है।
पार्टी को उम्मीद है कि वे पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करते हुए परिवार के लंबे राजनीतिक नेटवर्क का लाभ उठा पाएंगे।यह निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद लिया गया। अंतिम समय में वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्य इकाई में मतभेद दूर करने के लिए कई दौर की बैठकों का नेतृत्व किया।
इसी के साथ पार्टी ने बागलकोट से श्री उमेश मेती को भी उम्मीदवार बनाया है। उत्तर कर्नाटक में उनकी संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन पर दांव लगाया है।
पार्टी हाईकमान ने उम्मीदवारों के नाम तय करने से पहले अंदरूनी असंतोष को संभालने की कोशिश की, जो उपचुनाव के महत्व को दर्शाता है। श्री समर्थ मल्लिकार्जुन ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है, जबकि श्री उमेश मेती सोमवार को, नामांकन की अंतिम तिथि पर, पर्चा दाखिल करेंगे।
कर्नाटक विधानसभा के ये उपचुनाव कड़े मुकाबले की ओर बढ़ रहे हैं, जहां कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, जबकि टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर उभरी दरारें भी सामने आई हैं।
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