देहरादून , दिसंबर 05 -- उत्तराखंड में कांग्रेस धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट राज्यपाल को जल्द सौंपेगी।

कांग्रेस ने कहा कि बीते रोज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल धराली आपदा ग्रस्त क्षेत्र से वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करके वापस देहरादून लौट आया है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि धराली को लेकर राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

श्री गोदियाल ने धराली का आंखों देखा हाल शुक्रवार को पत्रकारों के साथ साझा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मृत लोगों की जो संख्या बताई है ,उसमें विरोधाभास है। आपदा प्रबंधन विभाग ने धराली आपदा को लेकर 67 लोगों को मृत या गुमशुदा बताया है। जबकि सरकार मे राज्य मंत्री कर्नल कोठियाल ने एक बैठक के दौरान अपने वक्तव्य में 147 लोगों के मलबे में दबे होने की बात कही है। लेकिन अब राज्य सरकार की तरफ से जो सफाई आई है उसमें 52 लोगों को गायब या मृत बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस विरोधाभास को दूर करें और प्रदेश की जनता,मीडिया व विपक्ष के समक्ष सच को लाये, क्योंकि आपदा राहत और बचाव कोई मजाक या राजनीति का मुद्दा नहीं बल्कि मानवीय आधार है।

उन्होंने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग टीम ने वहां पाया कि आपदा के चार महीने बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार धराली में पुनर्वास, पुनर्निर्माण ,राहत, विस्थापन आदि के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा पाई है, और ना ही किसी भी क्षेत्र में कोई पहल की गई है। वहां के स्थानीय आपदा प्रभावितों के अनुसार 250 नाली नाप की जमीन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। वहां 112 आवासीय मकान और करीब 70 होटल,रिजॉर्ट, होमस्टे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां केवल कुछ ही लोगों को मुआवजा दिया गया है। वहां मलबे के नीचे दबे हुए शब्दों को निकलने तक के उचित प्रयास नहीं किए गए हैं तथा वहां के निवासियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसी धराली में आपदा पीड़ित एक महिला ने मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली है, बाजार पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। वहां के सेब,राजमा, आलू उत्पादकों को इस आपदा से भारी नुकसान हुआ है। धराली में 112 लोगों को पांच-पांच लाख की आर्थिक सहायता दी गई है, लेकिन उसमें भी 38 लोगों को यह कहकर छोड़ दिया गया है कि आपका मकान पूरी तरह से नष्ट नहीं हुए हैं।

हकीकत यह है कि जो मकान वहां खड़े भी हैं वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उनकी निचली मंजिल मलबे में दब गई है। सरकारी मदद के अभाव में उन्हें मजदूर लगाकर अपने खर्चे पर मलबे को हटाने का काम करना पड़ रहा है।

श्री गोदियाल का कहना है कि कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने वहां की स्थिति का जो आकलन किया है, उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके जल्द राज्यपाल से मुलाकात कर राहत कार्यों में प्रगति का आग्रह करेगी।

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