रायपुर/, दिसंबर 06 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त जिला एवं शहर अध्यक्षों की पहली महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को राजीव भवन में आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने की जबकि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रभारी सचिव जरिता लेतफ्लांग और विजय जांगिड़ सहित वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही। इस बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों से लेकर वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और जन मुद्दों पर पार्टी की अगली रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि बैठक की शुरुआत नवनियुक्त जिला अध्यक्षों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान की प्रगति की समीक्षा, 14 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित ''वोट चोर, गद्दी छोड़'' महारैली में प्रदेशभर से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया। नेताओं ने ब्लॉक और जिला स्तर पर नियमित मासिक बैठकों की अनिवार्यता पर जोर देते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि संगठन सृजन कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा, ''आलाकमान ने आप सभी पर भरोसा जताया है। हमें भ्रष्ट सरकार के खिलाफ लड़ते हुए जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना है। आने वाले समय में संगठन को और धारदार बनाकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार वापस लाना हमारी प्राथमिकता है।''नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी देशभर में नया और मजबूत संगठन खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने धान खरीदी में अव्यवस्था, प्रति बोरा वसूले जा रहे शुल्क और किसान समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिला अध्यक्ष अपने क्षेत्रों में महिला कांग्रेस, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक में धान खरीदी, भूमि गाइडलाइन दरों में वृद्धि, संपत्ति कर और नकली होलोग्राम जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ''भाजपा सरकार की नीतियां किसान और व्यापारी विरोधी हैं। कांग्रेस को इन मुद्दों पर आक्रामक रूप से जनता के साथ खड़ा होना होगा।''बैठक में एआईसीसी सचिव जरिता लेतफ्लांग और सह-सचिव विजय जांगिड़ ने जिला अध्यक्षों को संगठनात्मक गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग और ब्लॉक स्तरीय बैठकों को अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए।
अंत में प्रदेशभर के जिला अध्यक्षों ने संगठन की मजबूती, जन समस्याओं को प्राथमिकता और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।
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