जयपुर , अप्रैल 18 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेसको महिला विरोधी बताया है और कहा है कि उसका इतिहास महिलाओं के अधिकारों के प्रति उपेक्षापूर्ण रहाहै। श्री राठौड़ ने शनिवार को अपने बयान में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि शाहबानो प्रकरण इसका स्पष्ट उदाहरण है, जब कांग्रेस सरकार ने संविधान में बदलाव कर उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी बना दिया और एक महिला को न्याय से वंचित कर दिया। यह कदम न केवल उस महिला के साथ अन्याय था, बल्कि देश की करोड़ों मुस्लिम बहनों के आत्मसम्मान को भी आघात पहुंचाने वाला था।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के जीवन को सम्मानजनक और सशक्त बनाने के बजाय कांग्रेस ने हमेशा उन्हें 'साइलेंट वोटर' के रूप में देखा। आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे उद्योग चला रही हैं,विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। अब वे 'साइलेंट वोटर' नहीं, बल्कि देश केभविष्य को दिशा देने वाली शक्ति हैं। उन्हें विधानसभा और लोकसभा में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाये,जिससे उनका आत्मविश्वास और स्वाभिमान मजबूत हुआ।
श्री राठौड़ ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री भैंरो सिंह शेखावत ने पंचायतों और निकायों में महिलाओं को आरक्षण देकर उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल की थी। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई नेताओं ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए प्रयास किये। चूंकि इस प्रकार के महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होताहै, इसलिए अपेक्षा की जाती है कि कांग्रेस भी इसमें सकारात्मक सहयोग दे। दुर्भाग्यवश, कांग्रेस को यह आशंका है कि महिलाओं को अधिक अधिकार देने से उनका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है,इसलिए वह ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन करने से बचती रही है।
उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण न केवल महिलाओं के साथ अन्याय है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक विकास मेंभी बाधक है। आज समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों और सम्मान कोसर्वोच्च प्राथमिकता दें और उनके सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर कार्य करें।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को डर है कि यदि महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक अधिकार मिल गये, तो उनकी पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति कमजोर हो जाएगी। यही कारण है कि वह महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी स्पष्ट और मजबूत समर्थन देने से बचती रही है। कांग्रेस को अब यह समझ लेना चाहिए कि देश की महिलाएं जाग चुकी हैं। वे अपने सम्मान, अधिकार और प्रतिनिधित्व के लिए किसी भी राजनीतिकछल-कपट को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में उनका उचित अधिकारदिया जाये और जो भी इसमें बाधा बनेगा, उसे जनता जवाब देगी।
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