वाराणसी , अप्रैल 24 -- उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने शुक्रवार को लखनऊ से वर्चुअल माध्यम से काशी के पत्रकारों से रूबरू हुए। गत 16 और 17 अप्रैल को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध किए जाने पर विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

खन्ना ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के झूठ को बेनकाब करते हुए स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। उन्होंने हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की बात कही। समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल कोटे के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना मात्र है।

भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ाई लड़ेगी। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है, ये दल राजनीतिक बहानों और देरी की दीवारें खड़ी कर देते हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में हिस्सा देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक बंधक बनाए रखा।

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