धार , नवम्बर 9 -- मध्यप्रदेश में धार जिला कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य गेट पर हुए हादसे में बुजुर्ग परसराम जाट की मृत्यु के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। प्रशासन ने घटना की जांच के लिए समिति गठित की है, लेकिन मृतक परिवार को अब तक किसी भी प्रकार की राहत राशि नहीं दी गई है। इस पर कांग्रेस ने प्रशासन की मंशा पर ही प्रश्न चिन्ह खड़े किए हैं।
नेता प्रतिपक्ष के प्रतिनिधि अजय सिंह ठाकुर ने कहा कि क्षतिग्रस्त लोहे के वजनदार दरवाजे के गिरने से हुई बुजुर्ग की मृत्यु के बाद अधिकारियों द्वारा केवल जांच दल गठित करना अपनी जवाबदारी से बचने जैसा है। यह प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण है। ठाकुर ने कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई घटना है।
उन्होंने कहा कि यदि यही घटना किसी आम नागरिक की लापरवाही से हुई होती तो अधिकारी उसी पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करते, लेकिन यहां जब घटना सरकारी परिसर में हुई है तो जिम्मेदार अधिकारी जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मृतक परसराम जाट पूरी तरह स्वस्थ थे और उनकी मृत्यु शासकीय परिसर में लगे जीर्ण-शीर्ण लोहे के दरवाजे के गिरने से हुई। अधिकारी चाहते तो रेडक्रॉस या अन्य किसी मद से तत्काल मुआवजा राशि स्वीकृत कर परिजन की सहायता कर सकते थे। लेकिन दुख की इस घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के बजाय जांच दल बनाकर अपनी जवाबदारी से बचना निंदनीय है। अजय सिंह ठाकुर ने प्रशासन से मृतक परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
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