कोलकाता , नवंबर 19 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) को यह निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि कक्षा 11-12 के शिक्षकों की चल रही भर्ती प्रक्रिया में कोई 'दागी' या अयोग्य उम्मीदवार शामिल नहीं हों।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का हवाला देते हुए, न्यायालय ने एसएससी को ऐसे उम्मीदवारों की पूरी और विस्तृत सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया।

याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने कहा कि अगर यदि किसी दागी उम्मीदवार का नाम साक्षात्कार सूची में शामिल पाया जाए, तो उसे हटा दिया जाए। यह सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश है।

उन्होंने आयोग को पहचान संबंधी पूरी जानकारी के साथ एक सूची प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया, क्योंकि वर्तमान सूची में केवल नाम और रोल नंबर ही दिए गए हैं।

"केवल नामों वाली सूची से पहचान स्थापित नहीं हो सकती। सर्वोच्च न्यायालय इस सूची को प्रकाशित इसलिए करवाना चाहता था, ताकि कोई भी अयोग्य उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल न हो सके।," उन्होंने कहा। उन्होंने आगे कहा कि पिता का नाम और पता जैसे विवरण भी दिए जाने चाहिए, ताकि व्यक्तियों की स्पष्ट पहचान हो सके।

न्यायाधीश ने बताया कि 2016 और 2025 की भर्ती प्रक्रिया में कई मामलों में एक ही उम्मीदवार के अलग-अलग रोल नंबर थे, इसी वजह से एक ज्यादा विस्तृत सूची प्रकाशित करना ज़रूरी हो गया। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है।

न्यायमूर्ति सिन्हा के निर्देश एक ऐसी याचिका की सुनवाई के दौरान आए हैं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पहले अयोग्य घोषित कर दिए गए उम्मीदवार भी एसएससी की नवीनतम साक्षात्कार सूची में स्थान पाने में सफल हो गए हैं।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ऐसे में आयोग की तत्परता पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की कई चेतावनियों के बावजूद कक्षा 11-12 की साक्षात्कार सूची में अयोग्य उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो गए हैं।

इस मामले में चार ऐसे उम्मीदवारों के नाम थे, जिनमें दो विकलांग व्यक्ति भी शामिल थे। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष रूप से सक्षम उम्मीदवारों को कुछ छूट दी है - इस तर्क का जवाब देते हुए न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल आयु-संबंधी लाभों पर लागू होती है। 'ये दोनों व्यक्ति दागी उम्मीदवार हैं। उन्हें भर्ती प्रक्रिया में क्यों भाग लेना चाहिए?,' उन्होंने कहा।

दरअसल एसएससी परीक्षा प्रक्रिया तब एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गई, जब शिक्षक बनने के इच्छुक कुछ लोग उच्च न्यायालय पहुंच गए और उन्होंने साक्षात्कार के लिए उम्मीदवारों का चयन करने के काम में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।

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