कोलकाता , मार्च 31 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर किये गये तबादले को चुनौती दी गयी थी।

न्यायालय ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है और इन फेरबदल को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ ने मामले को खारिज करते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की। न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को उनके मौजूदा पदों से अस्थायी तौर पर स्थानांतरित किया गया है और चुनाव आयोग प्रत्येक स्थानांतरण के कारणों को स्पष्ट करने के लिए बाध्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ये निर्णय चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाये रखने के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा हैं।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल बड़ी संख्या में किये गये स्थानांतरण को दुर्भावनापूर्ण मंशा का सबूत नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान देश भर में नियमित रूप से इस तरह के फेरबदल किये जाते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि तबादले प्रशासनिक निर्णय होते हैं और न्यायिक हस्तक्षेप केवल तभी उचित है, जब स्पष्ट रूप से कोई अवैधता हो या अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की गयी हो।

तबादले को सेवा का सामान्य हिस्सा बताते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी पीड़ित अधिकारी को अलग से कानूनी कार्यवाही के माध्यम से अपने व्यक्तिगत तबादले को चुनौती देने का अधिकार है। न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि जनहित याचिका को तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि जनहित को नुकसान होने का स्पष्ट सबूत न हो। इस मामले में याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहे कि इस फेरबदल से प्रशासन कैसे बाधित होगा या नागरिक आवश्यक सेवाओं से कैसे वंचित होंगे।

न्यायालय ने तबादलों के पीछे राजनीतिक साठगांठ के आरोपों को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने देखा कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ ऐसे आरोप लगाये गये थे, उन्हें मामले में पक्षकार के रूप में शामिल तक नहीं किया गया था, जिससे ये दावे और भी कमजोर हो गये। चुनाव आयोग के अधिकार को दोहराते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि शक्ति के दुरुपयोग या जनहित पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

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