चन्नापटना (कर्नाटक) , अप्रैल 2 -- इंसान और बंदर के बीच के रिश्ते की कहानी सिर्फ महाकाव्यों या मिथकों तक ही सीमित नहीं है बल्कि समय-समय पर यह वास्तविक जिंदगी में भी देखने को मिलती है। कर्नाटक से दिल को छू लेने वाला एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें चन्नापटना में एक बंदर को 85 वर्षीय महिला के शव को गले लगाकर रोते हुए दिखाया गया, जिनका विगत 30 मार्च को निधन हो गया। बंदर का दुख और महिला का साथ न छोड़ने का उसका भाव लोगों को गमगीन कर गया ।
एक 85 वर्षीय महिला कई सालों से एक रूटीन का पालन कर रही थी, जिस पर उसके आस-पास के लोगों के अलावा शायद ही किसी का ध्यान जाता था। वह एक बंदर को हर दिन खाना खिलाती थी जो नियमित रूप से उसके घर आता था। समय के साथ यह रिश्ता केवल खाने- खिलाने तक ही सीमित नहीं रहा। बार-बार मिलने-जुलने से दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी, एक-दूसरे के साथ सहजता महसूस होने लगी और एक ऐसा अनकहा रिश्ता बन गया जो हर बीते दिनों के साथ और मजबूत और गहरा होता गया।
वह शांत रिश्ता तब अचानक टूट गया जब उस महिला का निधन हो गया। लेकिन एक पल जो वीडियो में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, उसमें उस रिश्ते की गहराई एक अप्रत्याशित और भावुक तरीके से सामने आई।
बंदर जब महिला के बेजान शरीर के पास पहुंचा, तो ऐसा लगा मानो वो शोक में डूब गया हो। उसे समझ नहीं आय़ा कि वो बुजुर्ग महिला क्यों सोयी हुई है, उसे खाना क्यों नहीं दे रही। वह वहां से हट नहीं रहा था। वह उससे लिपट जाता था। धीरे से उसे छूता था और वहीं किसी उम्मीद में रूका हुआ था। मानो वह उस इंसान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया दे रहा हो जो वह प्रत्येक दिन किया करता था। उसमें न कोई बेचैनी थी और न ही कोई हड़बड़ी, बस उस इंसान के पास रहने की एक शांत लेकिन असाधारण कोशिश थी, जिसके साथ उसने अपना अपनापन और प्रत्येक दिन का साथ जोड़ लिया था।
इस दृश्य को देखने वाले आस-पास के लोगों और राहगीरों ने जानवर की असामान्य शांति और नजदीकी को गौर से देखा और इस पल को बेहद मार्मिक बताया। वीडियो में दिखाया गया है कि बंदर काफी देर तक शरीर के पास ही बैठा रहा। कई दर्शकों ने इस व्यवहार को किसी अपने को खोने पर जानवर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया माना है।
यह फुटेज तब से वायरल हो गया है और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के दिलों को छू गया है, जो इसमें वफादारी की एक ऐसी झलक देखते हैं जो इंसानों और जानवरों के बीच की सीमाओं से परे है। जो कभी सिर्फ खाना खिलाने का एक प्रत्येक दिन का काम था, वह अब पीछे मुड़कर देखने पर एक ऐसे रिश्ते की नींव के रूप में सामने आया है, जिसने जानवर के व्यवहार पर एक गहरी छाप छोड़ी है।
एक ऐसी दुनिया में जहां अक्सर रिश्ते पल भर के लिए ही बनते हैं। चन्नापटना की यह शांत घटना अपनी सादगी और भावनात्मक गहराई के कारण सबसे अलग नजर आती है। यह हमें याद दिलाती है कि दयालुता की छोटी-छोटी कोशिशें ऐसे रिश्ते बना सकती हैं जो अप्रत्याशित और बेहद भावुक तरीकों से हमेशा के लिए कायम रहते हैं।
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