बेंगलुरु , जनवरी 01 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य में सभी ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इसी वर्ष कराए जाएंगे।

इस ऐलान के जरिए सरकार ने वर्षों से चली आ रही उस देरी पर विराम लगाने की कोशिश की है, जो सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष के बीच एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा बन चुकी है।

यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ज़िला पंचायतों, तालुक पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव संवैधानिक रूप से तय अवधि से कहीं अधिक समय से लंबित हैं, जिसके चलते कई जमीनी स्तर की संस्थाएं लंबे समय से प्रशासकीय नियंत्रण में चल रही हैं। निर्वाचित परिषदों की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और संवैधानिक संस्थाओं ने बार-बार सवाल उठाए हैं। आलोचकों का आरोप है कि लगातार सरकारों ने राजनीतिक सुविधा के लिए विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था को कमजोर किया।

श्री शिवकुमार का यह बयान बेंगलुरु में नागरिक प्रशासन के पुनर्गठन को लेकर राज्य सरकार पर बढ़ते दबाव की पृष्ठभूमि में भी सामने आया है। ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को भंग कर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के गठन और राजधानी को पांच नगर निगमों में बांटने के प्रस्ताव ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में और देरी कर दी, जिससे सुधारों के समय और मंशा को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गयी।

श्री शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस वर्ष के भीतर सभी स्थानीय निकाय चुनाव कराने का दृढ़ संकल्प लिया है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन, आरक्षण चक्र और लंबित मुकदमों जैसी प्रक्रियागत बाधाओं का अब समाधान कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में ज़िला पंचायत और तालुक पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां चल रही हैं, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाएंगे।

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