बेंगलुरु , जनवरी 25 -- कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। यह सत्र तब विवादास्पद हो गया था, जब राज्यपाल ने विधानसभा और विधान परिषद को संबोधित करने से इनकार कर दिया था।
रिपोर्ट में 21 और 22 जनवरी की घटनाओं का विवरण दिया गया है। राज्यपाल गहलोत ने राज्य सरकार की ओर से तैयार किया गया संबोधन पढ़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य के संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था। रिपोर्ट भेजने से पूर्व राज्यपाल ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श किया था।
गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा में विवाद तब बढ़ गया था जब राज्यपाल गहलोत ने राज्य सरकार के भाषण के मसौदे को खारिज कर अपना अभिभाषण महज चंद पंक्तियों तक सीमित रखा। कांग्रेस नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राज्यपाल ने संबोधन के मसौदे में उन संदर्भों पर आपत्तियां जतायी थी, जिनमें संप्रग शासन के दौरान लागू की गयी मनरेगा योजना को कथित तौर पर केंद्र की ओर से 'रद्द' करने का उल्लेख था। श्री गहलोत ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रपति को सूचित किया कि उन्होंने मसौदे में संशोधन का सुझाव दिया था, जिसमें केंद्र सरकार की विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के कार्यान्वयन और प्रभाव की आलोचना वाले अंशों को हटाना शामिल था।
रिपोर्ट में संवैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए राज्यपाल के उठाये गये कदमों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। कथित तौर पर रिपोर्ट में कांग्रेस सदस्यों के व्यवहार का भी वर्णन किया गया है, जिन्होंने राज्यपाल के विधानसभा से बाहर निकलते समय नारे लगाये और उन्हें घेरने का प्रयास किया। इसके साथ ही सत्तारूढ़ दल और विपक्षी भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी शामिल हैं।
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