बेंगलुरु , दिसंबर 16 -- कर्नाटक में बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉस्को) अधिनियम के तहत मुरुघा मठ के पीठाधीश्वर शिवमूर्ति मुरुघा शरणारु को हाल ही में बरी किए जाने के फैसले के ख्किलाफ कथित पीड़िता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया है।

चित्रदुर्ग की द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगाधर हडपदा ने मठ द्वारा संचालित स्कूल के छात्रावास में रहने वाली दो नाबालिग लड़कियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से पीठाधीश्वर को अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए गत 26 नवंबर को बरी कर दिया था। अदालत ने दो अन्य सह-आरोपियों छात्रावास की वार्डन रश्मि और स्कूल सचिव परमशिवैया को भी बरी कर दिया था।

यह मामला मूल रूप से अगस्त 2022 में पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और आपराधिक धमकी के आरोप लगाए गए थे। यह शिकायत दो नाबालिग लड़कियों द्वारा की गई थी, जिन्होंने 1 जनवरी 2019 से 6 जून 2022 के बीच छात्रावास में रहते हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। जुलाई 2022 में ये लड़कियां छात्रावास छोड़कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास पहुंचीं, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

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