शिमला , मार्च 30 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर ने राज्य विधानसभा में मछली के पलायन पर खनन के असर, शिक्षा, पर्यावरण और जनहित के मुद्दे उठाए।

श्रीमती ठाकुर ने प्रश्नकाल के दौरान नदी की पारिस्थितिकी पर खनन गतिविधियों के बुरे असर को उजागर किया। उन्होंने कहा कि नदी के तल में अत्यधिक खनन से साफ पानी की धाराओं में मछलियों के प्राकृतिक पलायन पर असर पड़ रहा है, जिससे जलीय जैव विविधता बिगड़ रही है और मछली पकड़ने वाले समुदायों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने नदी प्रणालियों की सुरक्षा के लिए खनन के तरीकों को नियंत्रित करने और वैज्ञानिक मूल्यांकन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने मछलियों के पलायन में आने वाली रुकावटों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि सदस्यों द्वारा उठाया गया इलाका बीबीएमबी के जलग्रहण क्षेत्र में आता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के साथ उठाएगी और उसे निर्देश देगी कि इस मुद्दे को सुलझाते समय किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

श्रीमती ठाकुर ने बताया कि रेत और अन्य सामग्री का बेरोकटोक खनन करने से गाद जमा होने और आवास नष्ट होने की समस्या बढ़ जाती है, जिससे मछलियों के लिए पलायन करना और जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जलीय जीवन की सुरक्षा के लिए सुधारात्मक कदम उठाए और निगरानी तंत्र को मजबूत करे।

शून्यकाल के दौरान श्रीमती ठाकुर ने जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र (जिसका प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक विक्रम ठाकुर करते हैं) में हरिपुर कॉलेज बंद होने के बाद छात्रों को होने वाली समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कई छात्र, खासकर लड़कियां, उच्च शिक्षा से वंचित हो सकती हैं और उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह कॉलेज को बंद करने का फैसला वापस ले।

अध्यक्ष ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और उम्मीद जताई कि सरकार इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

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