पटना , नवंबर 03 -- कभी विपक्षी दल के राजनेताओं पर 'शोले' बरसाने वाले राजनेता के जुबां पर इस बार के चुनाव में 'शहद' सी मीठी बोली निकल रही है।

वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उतरे कई राजनेताओं ने अपने विपक्षी पार्टी और उनके राजनेताओं पर शोले बरसाये थे, लेकिन वर्ष 2025 के चुनाव में उनकी जुबां पर उनके लिये 'शहद' सी मीठी बोली निकल रही है। राजनीति में दोस्त हमेशा दोस्त नहीं रहते और अवसर देखकर दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं ।

वर्ष 2020 के चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल थी। राजग में सीटों के तालमेल के तहत उसे 11 सीटें मिली थी, जिसमें उसने चार सीटों पर जीत हासिल की थी। वर्ष 2020 में हुये बिहार विधानसभा चुनाव में श्री सहनी ने 'महागठबंधन' का साथ छोड़ 'राजग' का दामन थाम लिया था। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर पीठ में छूरा भोंकने का आरोप लगाते हुए कम सीटें देने का आरोप लगाया था। इस चुनाव में वीआईपी प्रमुख श्री सहनी ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर जमकर हमला बोला था। राजद नेताओं के विरूद्ध चुनावी सभा में 'आग' उगलने वाले मुकेश सहनी अब तेजस्वी यादव के साथ है और अपनी वाणी में उनके लिये 'अमृत' घोल रहे हैं, जबकि पिछले चुनाव में राजग नेताओं के लिये मीठे बोल बोलने वाले श्री सहनी उनके विरूद्ध 'आग' उगल रहे हैं।

वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी (लोजपा) ने 135 सीटों पर अकेले अपने दम पर लड़ा। लोजपा ने जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की सभी 115 सीट के साथ राजग में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ,विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की कुछ सीट पर भी उम्मीदवार उतारे थे। चिराग की पार्टी लोजपा ने उस समय नारा दिया ,मोदी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं।.जाहिर है कि यह नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचाने के लिए चिराग ने यह फैसला लिया था। हालांकि इस चुनाव में लोजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसे केवल एक सीट मिली। इस बार चिराग की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राजग का हिस्सा है। वर्ष 2020 की चुनावी सभाओं में नीतीश कुमार की पार्टी (जदयू) के प्रत्याशियों के विरूद्ध 'शोले' बरसाने वाले चिराग इस बार चुनावी सभाओं में जदयू के उम्मीदवारों के लिये अपनी जुबां पर शहद घोल रहे हैं।

वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उपेन्द्र कुशवाहा ने छह दलों वाले ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट (जीडीएसएफ) का गठन किया। इस गठबंधन में श्री कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा), मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा), असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेटिक),सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल रही। श्री कुशवाहा इस गठबंधन के लिये मुख्यमंत्री उम्मीदवार थे।इस चुनाव में श्री कुशवाहा की पार्टी ने 99 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन सभी को पराजय का सामना करना पड़ा। वर्ष 2025 में श्री कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (राजग) के खेमे में है। वर्ष 2020 के चुनाव में राजग के प्रत्याशियों के लिये'आग' बरसाने वाले श्री कुशवाहा उन पर 'फूलों' की बारिश कर रहे हैं।

इसी तरह कई अन्य राजनेता ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिये अपनी वाणी में 'अमृत का रस' घोला था और अब वह उनके लिये अपनी वाणी में 'जहर' घोल रहे हैं।

देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी पार्टी और राजनेताओं पर कभी 'आग कभी 'शोला' बरसाने वाले इन राजनेताओं में से जनता किसके पक्ष में 'फूल' बरसाती है।

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