चंडीगढ़ , जनवरी 13 -- पंजाब के कपूरथला जिले की निवासी सरबजीत कौर की भारत वापसी फिलहाल रोक दी गई है क्योंकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें भारत वापस भेजने के बजाय उनका वीजा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति तीर्थयात्रा समूह के साथ पाकिस्तान गई थीं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह निर्णय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद लिया गया है जिससे उन्हें स्थानीय अदालत में कानूनी कार्यवाही जारी रहने तक देश में रहने की अनुमति मिल गई है। यह मामला फिलहाल लाहौर में विचाराधीन है जिसने उनकी तत्काल वापसी की किसी भी कार्रवाई को रोक दिया है।
सुश्री कौर ने गुरु नानक देव जी की जयंती के अवसर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले 10 दिवसीय सिख जत्थे के साथ चार नवंबर को अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश किया था। यह समूह 13 नवंबर को भारत लौट आया लेकिन नियमित जांच के दौरान एक तीर्थयात्री लापता पाया गया। बाद में पता चला कि सुश्री कौर ने न ही आधिकारिक रूप से पाकिस्तान छोड़ा था और न ही भारत में पुनः प्रवेश किया था।
तलाशी के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ दस्तावेज़ सामने आए जिनसे पता चला कि उसने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया, अपना नाम नूर फातिमा हुसैन रख लिया और शेखूपुरा के नासिर हुसैन नामक एक व्यक्ति से शादी कर ली। कुछ दिनों बाद, एक वीडियो भी सामने आया जिसमें वह धर्म परिवर्तन की इच्छा व्यक्त करती हुई और यह कहती हुई नजर आयी कि यह रिश्ता उसने स्वेच्छा से किया था।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने बाद में उनके आव्रजन दस्तावेजों में अनियमितताओं की ओर ध्यान दिया, जिसमें राष्ट्रीयता एवं पासपोर्ट संबंधी जानकारी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां अधूरी थीं, जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो गया। पुलिस ने आखिरकार जनवरी की शुरुआत में कौर और उनके पति का पता लगाया और सत्यापन प्रक्रिया के तहत उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया।
इसके बाद दंपति ने स्थानीय अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया है। इससे पहले लाहौर उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि अगर विवाह एवं धर्मांतरण स्वेच्छा से किए गए तो दंपति पर अनुचित दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
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