रायपुर , जनवरी 25 -- छत्तीसगढ़ में लोक आस्था और धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पचरा गीत के लिए चर्चित कथावाचक पं. युवराज पांडेय द्वारा मंच से अपनी सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता के बाद यह मुद्दा सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कथावाचकों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में "सनातनियों की सरकार" है और साधु-संतों व कथावाचकों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि जब सरकार डाकुओं तक को सुरक्षा उपलब्ध कराती है, तो साधु-संतों को सुरक्षा देने में कोई संकोच नहीं हो सकता।

मंत्री के इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने आज कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने मंत्री की राजधानी टिप्पणी को आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि सरकार अक्सर बाहर से आने वाले साधु-संतों को सुरक्षा मुहैया कराती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के अपने कथावाचकों और स्थानीय साधु-संतों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाता है। बैज ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को किसी को सुरक्षा दिए जाने पर आपत्ति नहीं है, बल्कि मांग यह है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य रूप से किए जाएंपीसीसी चीफ ने कहा कि हाल के वर्षों में कई धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में भगदड़ की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें लोगों की जान तक चली गई। ऐसे में सभी आयोजनों में सुरक्षा को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मंत्री के "डाकुओं को सुरक्षा" वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। बैज ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार खुद लुटेरों की सरकार बन चुकी है।

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