कौशांबी , फरवरी 15 -- महाशिवरात्रि के अवसर पर 51 शक्तिपीठ में शामिल शीतला देवी धाम कड़ा के गंगा तट पर स्थित कालेश्वर खंडित शिवलिंग का जलाभिषेक एवं पूजा अर्चना के लिए शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। बताया जाता है कि महाराज पांडु के ज्येष्ठ पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर अपने अज्ञातवास की अवधि में कड़ा धाम आए थे और यहां घने जंगल में गंगा नदी के सुरम्य तट पर महाकालेश्वर शिवलिंग की स्थापना कर गंगा जलसे शिवलिंग का स्नान कराकर भगवान शिव की पूजा अर्चना किया था। तबसे निरंतर लोग कालेश्वर गंगाघाट पहुंच कर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़कर पूजा अर्चना करते हैं। शिव भक्तों का मानना हैं कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से सभी भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं मानो वांछित कामनाएं पूर्ण होती हैं।
मान्यता है कि खंडित देवी देवताओं और शिवलिंग की पूजा अर्चना नहीं होती लेकिन शायद देश का यह पहला शिव मंदिर है जिसमें स्थापित खंडित शिवलिंग की श्रद्धालु पूरे भावके साथ गंगाजल बेलपत्र धूप दीप अक्षत अर्पित कर पूजा अर्चना करते हैं। बताते हैं कि कट्टर मुस्लिम बादशाह औरंगज़ेब कालेश्वर घाट स्थित मंदिर में स्थापित शिवलिंग को तोड़ने क लिए अपने सैनिकों को भेजा था सैनिकों ने जैसे ही शिवलिंग तोड़ने के लिए तलवार से प्रहार किया तो शिवलिंग का आंशिक भाग खंडित हो गया। उससे मधुमक्खियों के झुंड ने निकल कर औरंगजेब की सेना पर आक्रमण कर दिया और जान बचाकर सैनिक वहां से भाग निकले।
महाशिवरात्रि के अवसर पर आज जिले भर में गंगा घटों पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान का र्कम जारी है। सुबहसे ही शिव मदिरों में भक्तोंकी भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
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