नयी दिल्ली , जनवरी 05 -- इस साल जून तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 51 डॉलर प्रति बैरल तक टूट सकता है और रुपया तीन प्रतिशत मजबूत होकर 88 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक की बाजार अध्ययन इकाई एसबीआई रिसर्च ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही है। उसने बताया कि ओपेक प्लस देशों के उत्पादन बढ़ाने के फैसले से आम तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही है। बाद में उत्पादन घटाने की रणनीति के बावजूद दाम नहीं बढ़े हैं। साल 2022 से अब तक मध्यम अवधि में मानक ब्रेंट क्रूड और भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत टूटी है।
ओपेक प्लस में तेल निर्याक देशों के संगठन ओपेक के अलाव कुछ गैर-ओपेक तेल निर्यातक देश भी शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का परिदृश्य इसमें गिरावट के संकेत देता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन ने भंडार बढ़ने के कारण इस साल जनवरी-मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 55 डॉलर प्रति बैरल रहेगी। उसने कहा है कि कच्चे तेल के भारतीय बास्केट से ब्रेंट 98 प्रतिशत जुड़ा हुआ है। इससे जाहिर है कि भारतीय बास्केट में भी नरमी आयेगी।
एसबीआई रिसर्च ने भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत मार्च तक घटकर 53.31 डॉलर और जून तक 51.85 डॉलर प्रति बैरल पर आने का अनुमान जताया है।
उसने कहा कि अब तक ऐतिहासिक औसत के दृष्टिगत कीमतों में गिरावट का 48 प्रतिशत लाभ ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई दर 3.4 फीसदी से कम रहेगी।
उसने कहा है कि कच्चा तेल देश के आयात बिल का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल पर खर्च होता है। इसकी कीमत घटने से रुपये को समर्थन मिलेगा और यह तीन प्रतिशत मजबूत होकर 87.5 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच सकता है। इससे सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर में 0.10 प्रतिशत से 0.15 प्रतिशत उछाल का अनुमान है।
उल्लेखनीय है कि इस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 61 डॉलर प्रति बैरल पर और रुपया 90.30 रुपये प्रति डॉलर पर है।
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