नयी दिल्ली , अक्टूबर 28 -- औद्योगिक उत्पादन के सितंबर के आंकड़ों को देश की आर्थिक गतिविधियों की आगे की दिशा के बारे में एक मिलाजुला संकेत मानते हुए विशेषज्ञों ने मंगलवार को कहा कि ताजा आंकड़े औद्योगिक क्षमता के उपयोग में वृद्धि दर्शाने वाले हैं, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था की ओर से आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम बना हुआ है।
सरकारी के आज जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर चार प्रतिशत बढ़ा जो करीब-करीब इसके पिछले माह के बराबर है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि सितंबर में खनन (शून्य से 0.4 प्रतिशत नीचे) और बिजली (3.1 प्रतिशत) के बाद प्राथमिक वस्तु क्षेत्र (1.4 प्रतिशत) की उत्पादन वृद्धि इससे पिछले माह की तुलना में कम रही है। अगस्त में इन क्षेत्रों के उत्पादन की वृद्धि दर क्रमश: 6.6 प्रतिशत, 4.1 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा कि गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट सितंबर में भी जारी रही, लेकिन अगस्त के 6.4 प्रतिशत की तुलना में गिरावट 2.9 प्रतिशत तक सीमित रही।
उन्होंने कहा कि सितंबर तिमाही में औद्योगिक वृद्धि दर जून तिमाही के 2 प्रतिशत की तुलना में सुधर कर 4.1 प्रतिशत हो गयी लेकिन "हमें बाहरी कारकों के कारण विकास में गिरावट का जोखिम दिखाई दे रहा है।"श्री जोशी ने सितंबर में ऊंचे शुल्क के कारण अमेरिका को हुए निर्यात में सालाना आधार पर 11.9 प्रतिशत की गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उसके साथ व्यापार समझौता जल्द ही हो जाता है, तो इससे कुछ हद तक प्रभाव कम हो जायेगा। साथ में उनकी राय है कि आयकर में कटौती और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाने, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और कम खाद्य मुद्रास्फीति से निजी उपभोग को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत के स्तर पर रहेगी, जिसमें फिलहाल गिरावट का जोखिम दिखता है।"सितंबर में टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु, बुनियादी ढांचे एवं निर्माण वस्तु, मध्यवर्ती वस्तु और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में अगस्त की तुलना में मामूली सुधार रहा।
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