हैदराबाद , जनवरी 01 -- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इस दावे को "हैरान करने वाला और अस्वीकार्य" बताया है कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच शंति के लिए मध्यस्थता की थी।

श्री ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत सरकार को आधिकारिक तौर पर इस दावे का खंडन करना चाहिए और देश को आश्वस्त करना चाहिए कि भारत और पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, "एक तरफ, चीन पाकिस्तान को 81 प्रतिशत हथियार आपूर्ति करता है और कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रियल-टाइम इंटेलिजेंस भी दिया था। दूसरी तरफ वह खुद को मध्यस्थ होने का दावा करता है। एक देश के तौर पर हम इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं कर सकते।"उन्होंने चीन पर दक्षिण एशिया में खुद को एक बड़ी शक्ति के रूप में पेश करते हुए भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि "क्या प्रधानमंत्री के चीन दौरे के समय मोदी सरकार ने इसी बात पर सहमति जताई थी।"श्री ओवैसी ने यह भी बताया कि पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से पहले युद्धविराम की घोषणा की थी और शांति बनाए रखने के लिए व्यापार प्रतिबंधों का इस्तेमाल करने का दावा किया था। उन्होंने कहा, "अब हमारे पास चीनी विदेश मंत्री हैं जो आधिकारिक तौर पर इसी तरह के दावे कर रहे हैं।" उन्होंने इस स्थिति को भारत का अपमान बताते हुए जोर देकर कहा कि सरकार को मजबूती से जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंधों में सामान्य स्थिति भारत के सम्मान या उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं आ सकती।

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