भुवनेश्वर , जनवरी 03 -- ओडिशा सरकार एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून और रामसर साइट चिल्का झील के मरम्मत का काम जल्द ही शुरू करने जा रही है। चिल्का झील के मुहाने पर गाद जमने से इसके खारे पानी की प्रकृति पर बुरा असर पड़ा है।
ओडिशा के लोक निर्माण मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस संदर्भ में विभागीय अधिकारियों, चिल्का विकास प्राधिकरण (सीडीए) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास को तुरंत उपाय शुरू करने और व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया है।
चिल्का क्षेत्र के जैव विविधता संरक्षण और विकास पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने शनिवार को कहा कि झील के मुहाने पर गाद जमने से झील और समुद्र के बीच पानी के प्राकृतिक आदान-प्रदान में बाधा उत्पन्न हुई है।
चिल्का झील के मुहाने पर गाद जमने के कारण समुद्र का पानी ठीक से झील में प्रवेश नहीं कर पा रहा है, जिससे इसके खारेपन पर असर पड़ रहा है और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है। इस बाधा के कारण मछलियों और अन्य समुद्री जीवों की आबादी में काफी उतार-चढ़ाव आया है, जिससे झील की समृद्ध जैव विविधता को खतरा पैदा हो गया है।
इस बैठक में वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग, चिल्का विकास प्राधिकरण और आईआईटी चेन्नई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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