भुवनेश्वर , अक्टूबर 20 -- ओडिशा सरकार ने राज्य में प्रमुख औद्योगिक और अवसंरचना परियोजनाओं की नियमित निगरानी एवं समीक्षा के लिए एक समर्पित तंत्र स्थापित किया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सभी विभागों और जिला कलेक्टरों को चल रही परियोजनाओं का निरंतर पर्यवेक्षण और समय पर मूल्यांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने पीएमजी पोर्टल पर सूचीबद्ध परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और विलंबित निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा समग्र निगरानी संरचना को मजबूत करने का निर्देश दिया।
परियोजना की निगरानी बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया कि जिला-स्तरीय समीक्षा बैठकें प्रत्येक मात की सात तारीख तक आयोजित की जाएगी जबकि विभागीय प्रमुख 12 तारीख तक समीक्षा करेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय समीक्षा प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को होगी।
श्री आहूजा की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय तृतीय टास्क फोर्स समिति की बैठक में विभिन्न जिलों में प्रमुख अवसंरचना और औद्योगिक परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने प्रभावी परियोजना प्रबंधन और तीव्र निष्पादन के लिए सभी स्तरों पर संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समिति ने राज्य सरकार के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के अनुसार चुनिंदा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज से संबंधित मुद्दों की भी जांच की।
श्री आहूजा ने आईडीसीओ और संबंधित जिला प्रशासन को परियोजना कार्यान्वयन को प्रभावित करने वाली भूमि अधिग्रहण संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। शेष प्रभावित भूमि मालिकों को प्रतिपूरक सहायता प्रदान करने तथा कार्यान्वयन एजेंसियों की आवश्यकता के अनुसार ओपीटीसीएल द्वारा विद्युत सबस्टेशनों की स्थापना में तेजी लाने पर चर्चा की गई। बैठक में क्योंझर, बलांगीर, जगतसिंहपुर और खोरधा जैसे जिलों में हथकरघा एवं वस्त्र विभाग तथा जिला प्रशासन को बुनाई परियोजनाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए भूमि अधिग्रहण, सड़क संपर्क, जलापूर्ति और बिजली से संबंधित मुद्दों का समाधान करने के निर्देश दिया गया।
समिति ने औद्योगिक पार्कों और प्रमुख पाइप पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की तथा निर्देश दिया कि ऐसे सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए तेजी से काम किया जाए।
उल्लेखनीय है कि 24 सितंबर 2025 को आयोजित 49वीं प्रगति बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर बल दिया था कि परियोजना में देरी से न केवल लागत दोगुनी हो जाती है बल्कि नागरिकों को आवश्यक सेवाओं और अवसंरचना तक समय पर पहुंच से भी वंचित होना पड़ता है।
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