भुवनेश्वर , दिसंबर 04 -- ओडिशा विधानसभा में हीराकुंड बांध की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गयी। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्य प्रसन्न आचार्य ने चेतावनी दी कि बहुत अधिक गाद ने जलाशय की पानी रोकने की क्षमता को काफी कम कर दिया है।

श्री आचार्य ने शून्यकाल के दौरान कहा कि पिछले साल के मूल्यांकन के अनुसार बहुत अधिक गाद जमा होने के कारण जलाशय की क्षमता में 27 प्रतिशत की कमी आई है।

उन्होंने चेतावनी दी कि गाद को निकालने की कोशिशों का लगातार न होना न केवल ओडिशा बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा खतरा है।

उन्होंने बांध के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार तकनीकी कर्मचारियों की कमी पर जोर देते हुए राज्य सरकार से तुरंत गाद को निकालने के उपाय करने और संभावित आपदा को रोकने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों को नियुक्त करने का आग्रह किया।

श्री आचार्य ने बताया कि जलाशय से गाद को निकालने की पिछली कोशिशें इसलिए असफल हो गई थीं क्योंकि जिस कंपनी को यह काम सौंपा गया था, वह नतीजे नहीं दे पाई थी।

उन्होंने पर्यटन विकास के हिस्से के तौर पर होटल बनाने के लिए बड़ी कंपनियों को जलाशय के पास जमीन देने के सरकार के फैसले की आलोचना की और कहा कि पर्यटन के हितों से पहले बांध की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

श्री आचार्य के सवालों का जवाब देते हुए राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने सदन को बताया कि केंद्र ने पहले ही हीराकुंड समेत पूरे भारत के 20 बड़े बांधों को कवर करते हुए बांध सुरक्षा एक्ट, 2021 लागू कर दिया है। मंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से इस स्थिति पर चर्चा की है। श्री पुजारी ने कहा कि हालांकि पहले एक जापानी फर्म को गाद हटाने के लिए लगाया गया था लेकिन जलाशय के अंदर पेड़ों के तने होने के कारण काम में बहुत कम प्रगति हुई।

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