भुवनेश्वर , अक्टूबर 28 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने चक्रवाती तूफान 'मोंथा' से निपटने के लिये पूरी तैयारी कर ली है और प्रशासन को समय पर कार्रवाई करने तथा किसी भी तरह की जनहानि को रोकने के निर्देश दिये गये हैं।।
इस चक्रवात के आंध्र प्रदेश तट पर पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन भारी बारिश और तेज हवाओं से दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों पर असर पड़ने की संभावना है।
श्री माझी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति संवेदनशील क्षेत्रों में न रहे और सभी निवासियों को चक्रवात या बाढ़ आश्रयों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि पिछले साल चक्रवात 'दाना' के दौरान ओडिशा ने समय पर चक्रवात से निपटने की कार्रवाई कर किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में यह रणनीति राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इंजीनियरिंग विभागों को चक्रवात के बाद की घटनाओं से निपटने के लिये पूरी तरह तैयार रहने का भी निर्देश दिया ताकि उखड़े हुए पेड़ों को सड़कों से तुरंत हटाया जा सके।
श्री माझी ने कहा कि यह सीजन फसल कटाई का है और इस समय चक्रवात से जो नुकसान हो सकता है, उसके त्वरित आकलन के लिये कृषि विभाग को तैयार रहने तथा प्रभावित किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिये गये हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी पिछले तीन दिनों से तैयारियों के मद्देनजर रोजाना समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और सभी विभाग हाई अलर्ट पर हैं।
श्री माझी ने विभागीय सचिवों और जिला कलेक्टरों को स्थिति पर कड़ी नजर रखने और सभी तैयारी संबंधी उपायों का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। बैठक के दौरान विशेष राहत आयुक्त, पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों ने अपनी तैयारी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस तरह का अनुमान है कि चक्रवात का आठ जिलों-गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट, मलकानगिरी, कंधमाल, कालाहांडी और नवरंगपुर पर प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात की आशंका से संवेदनशील स्थानों से निकाले गये लोगों के लिए कुल 2,048 चक्रवात और बाढ़ आश्रय स्थल तैयार किये गये हैं। अब तक 11,396 लोगों को चक्रवात संवेदनशील क्षेत्रों से निकाला जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर 30,554 और लोगों को स्थानांतरित किया जाएगा।
इसके अलावा, 2,693 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा चुका है। 1,871 महिलाओं को पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया जा चुका है और 822 महिलाओं को स्थानांतरित किया जा रहा है। आपदा से निपटने के लिए, 30 ओडीआरएएफ टीमें, 5 एनडीआरएफ टीमें और 123 अग्निशमन इकाइयां तैनात की गई हैं। साथ ही अतिरिक्त टीमों को तैयार रखा गया है। आठ प्रभावित जिलों के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र 30 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। स्थिति के आधार पर इनके बंद रहने की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।
इंजीनियरिंग विभागों ने निर्बाध बिजली और पेयजल आपूर्ति के लिए तैयारी सुनिश्चित की है और आवश्यक सेवा केंद्रों पर बैकअप के रूप में डीजी सेट रखे गए हैं। सरकार ने 31 अक्टूबर तक तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है।
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