भुवनेश्वर , जनवरी 05 -- ओडिशा में चल रहे 2025-26 धान खरीद सत्र के दौरान 19.67 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तीन जनवरी तक 2,71,318 किसानों ने 12.05 लाख टन धान बेचा है।
खरीफ 2025-26 मौसम के लिए कुल 61,67,414 एकड़ में धान की खेती की गई। पिछले मौसम में 2024-25 में राज्य ने 73.45 लाख टन खरीफ धान और 19.18 लाख टन रबी धान की खरीद की थी।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मंडियों से धान की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करें, सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं और यह सुनिश्चित करें कि किसानों को कोई असुविधा न हो और उन्हें उनका भुगतान सुचारू रूप से प्राप्त हो।
उन्होंने खरीफ धान की खरीद की वर्तमान स्थिति एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के प्रभावी प्रबंधन की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश एवं सुझाव दिए।सुश्री गर्ग ने कुशल प्रणाली प्रबंधन के लिए कॉल सेंटर और नियंत्रण कक्ष की नियमित निगरानी के महत्व पर भी बल दिया।
गौरतलब है कि तीन जनवरी तक 18 जिलों में धान की खरीद शुरू हो चुकी है और अब तक लगभग 11.84 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। खरीद प्रक्रिया को किसानों के लिए सुविधाजनक एवं पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने उपग्रह चित्रों के उपयोग सहित कई तकनीकी समाधान अपनाए हैं। मुख्य सचिव ने किसान-सोसायटी संपर्क, टोकन प्रणाली, गुणवत्तापूर्ण जांच, मिल मालिकों द्वारा धान की ढुलाई, किसानों के बैंक खातों में 48 घंटों के भीतर सीधे भुगतान हस्तांतरण, मिल से चावल की प्राप्ति एवं समग्र प्रणाली प्रबंधन से संबंधित प्रणालियों की भी समीक्षा की।
मंडियों में सीसीटीवी निगरानी, मंडी नोडल अधिकारियों के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन वाहन ट्रैकिंग और देरी होने पर त्वरित समाधान तंत्र जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं फीडबैक तंत्र के सहयोग से 24 घंटे कॉल सेंटर कार्यरत है। खरीद प्रक्रिया के लिए राज्य में 1,418 मिल मालिकों को शामिल किया गया है। खरीद की मात्रा में वृद्धि को देखते हुए, भंडारण की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त स्मार्ट गोदाम सुविधाएं बनाने पर चर्चा की गई।
लगभग 4,000 धान खरीद केंद्र 2,600 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, 400 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न पानी पंचायतों के सहयोग से कार्यरत हैं। वर्तमान में, 6.5 लाख टन की संयुक्त क्षमता वाले 162 सरकारी गोदामों का उपयोग किया जा रहा है।
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