भुवनेश्वर , अप्रैल 13 -- ओडिशा में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 'शिक्षक कैडर आरक्षण अधिनियम' लागू कर दिया गया है।
राज्यपाल हरिबाबू कम्भमपति की मंजूरी मिलने के बाद 'ओडिशा सरकारी विश्वविद्यालय (शिक्षक कैडर आरक्षण) अधिनियम, 2026' पूरे राज्य में आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। यह अधिनियम 31 मार्च की देर रात तक चली लंबी चर्चाओं के बाद विधानसभा में पारित किया गया था और अब यह राज्य में एक अधिक समावेशी और न्यायसंगत उच्च शिक्षा व्यवस्था का द्वार खोलेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने राज्यपाल की मंजूरी पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस अधिनियम के पारित होने को राज्य के शैक्षिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
श्री सूरज ने बताया कि यह नया कानून ओडिशा के विश्वविद्यालयों में शिक्षण पदों पर अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।
इस अधिनियम द्वारा लाए गए प्रमुख बदलावों में से एक विभाग-आधारित आरक्षण प्रणाली में किया गया आमूल-चूल परिवर्तन है, जिसे अब विश्वविद्यालय-व्यापी आरक्षण दृष्टिकोण से बदल दिया गया है। इससे प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे संकाय (फैकल्टी) पदों की भर्ती प्रक्रिया में अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकेगा।
श्री सूरज ने यह भी बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद पर लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को अब भर दिया गया है। ओडिशा के शिक्षित समुदाय से ही कुल 14 कुलपतियों की नियुक्ति की गई है, जो अकादमिक क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि ओडिशा की उच्च शिक्षा व्यवस्था का नेतृत्व ऐसे व्यक्तियों के हाथों में हो, जो स्थानीय संदर्भों और चुनौतियों को भली-भांति समझते हैं। मंत्री ने भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इन नव-नियुक्त कुलपतियों के नेतृत्व में ओडिशा के विश्वविद्यालय उच्च-गुणवत्ता वाली, अनुसंधान-आधारित और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।
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