भुवनेश्वर , दिसंबर 09 -- ओडिशा में विपक्षी बीजू जनता दल(बीजद) और कांग्रेस ने वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर उसको याद करने के प्रस्ताव का समर्थन किया लेकिन इसके गायन का जब वक्त आया तब बहिर्गमन कर गए।
ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन यह प्रस्ताव पेश किया, जिसका दोनों पार्टियों ने समर्थन किया , लेकिन प्रस्ताव पारित होने तथा गाना शुरू होने के बाद बीजद और कांग्रेस के सदस्य सदन से बाहर चले गए।
बीजद के उप विधायक दल के नेता प्रसन्न आचार्य और कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने इस पर बाद में अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने वंदे मातरम और संविधान के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए कहा कि संविधान सभा ने सिर्फ पहले दो छंदों को गाने की अनुमति दी थी। इस संवैधानिक दिशा-निर्देश के सम्मान में पहले दो छंद गाए जाने के बाद वे बाहर चले गए।
श्री आचार्य ने जोर दिया कि जो संवैधानिक रूप से मान्य नहीं है, उसे आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए वंदे मातरम को सिर्फ एक गीत से कहीं अधिक एक ऐसा मंत्र बताया जिसने 150 साल पहले देश को प्रेरित किया था और आज भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की विरासत, संस्कृति, एकता और पहचान का प्रतिनिधित्व करता है।
कांग्रेस नेता कदम ने भी इस उत्सव का समर्थन किया लेकिन भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने वंदे मातरम को एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी कमजोर होते रुपये, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की चिंताओं और इंडिगो संकट के बाद विमानन क्षेत्र में आई दिक्कतों जैसे जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
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