भुवनेश्वर , मार्च 03 -- ओडिशा के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा करते हुए तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने घोषणा की है कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से राज्य से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार आगामी राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे।

उनके इस फैसले ने चौथी राज्यसभा सीट के लिये दावेदारी को तेज कर दिया है। इससे यह हाई प्रोफाइल राजनीतिक मुकाबला बन गया है। श्री राय के चुनावी मैदान में उतरने से पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गयी हैं।

ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 79 सीटें हैं। उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। इससे वह ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल करने के लिए आरामदायक स्थिति में है। वहीं 48 सदस्यों वाली बीजू जनता दल (बीजद) एक सीट आसानी से जीत लेगी।

असली मुकाबला चौथी सीट के लिए है, जिस पर प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट और ओडिशा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दत्तेश्वर होता और दिलीप राय के बीच सीधा मुकाबला होने जा रहा है।

डॉ. होता बीजद और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार हैं, जबकि श्री राय भाजपा के समर्थन से निर्दलीय लड़ रहे हैं।

इससे पहले भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी के ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार के नामों को अपने उम्मीदवार के तौर पर मंजूरी दी थी। इस घोषणा के तुरंत बाद श्री राय ने बतौर निर्दलीय चुनावी दौड़ में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा की। श्री सामल ने तुरंत पुष्टि की कि भाजपा चौथी सीट के लिए श्री राय की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी।

श्री राय अपने साथ दशकों का राजनीतिक अनुभव लेकर आये हैं। वह 1985-90 और 1990-95 के बीच राउरकेला से दो बार विधायक चुने गये थे और बीजू पटनायक के नेतृत्व वाली जनता दल सरकार में उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया था।

उन्होंने पहली बार 1996 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा में प्रवेश किया था और 2002 में बतौर निर्दलीय फिर चुने गये थे। उस समय उन्होंने बीजद और कांग्रेस दोनों के सदस्यों के क्रॉस-वोटिंग के जरिये कांग्रेस उम्मीदवार मॉरिस कुजूर को हराया था।

बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने के उनके पिछले फैसले के बाद बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। उस झटके के बावजूद श्री राय पार्टी लाइन से परे समर्थन हासिल कर सीट जीतने में कामयाब रहे थे।

राज्यसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ओडिशा की जनता दल सरकार में उद्योग राज्य मंत्री के रूप में अपनी पिछली भूमिका के अलावा केंद्र में इस्पात, संसदीय कार्य, कोयला और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।

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