भुवनेश्वर , नवंबर 10 -- ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने एक राजनीतिक दल के उन आरोपों को सोमवार को खारिज कर दिया जिनमें नुआपाड़ा के जिला कलेक्टर पर आगामी उपचुनाव के लिए गंजम से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से भरा एक ट्रक अवैध रूप से ले जाने का आरोप लगाया गया था।
सीईओ ने इन दावों को 'निराधार और कपटपूर्ण' बताते हुए कहा कि इस तरह के निराधार आरोप चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को भ्रमित करने का काम करते हैं।
सीईओ कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में ओडिशा के लोगों से चुनाव प्रक्रियाओं के बारे में अपुष्ट रिपोर्टों या अफवाहों पर विश्वास न करने का आग्रह किया। बयान में स्पष्ट किया गया कि एक राजनीतिक दल ने आरोप लगाया था कि नौ नवंबर को ईवीएम से भरा एक ट्रक अवैध रूप से गंजम से नुआपाड़ा लाया गया था। यह खबर एक समाचार चैनल ने भी सीईओ कार्यालय से पुष्टि किए बिना प्रसारित की थी।
सीईओ कार्यालय ने ईवीएम और वीवीपैट के भंडारण एवं सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग (ईसी) के कड़े प्रोटोकॉल की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के लिए ईवीएम को स्थानांतरित करना या उनमें हेरफेर करना बिल्कुल भी संभव नहीं है।
विज्ञप्ति के अनुसार ओडिशा में सभी ईवीएम और वीवीपैट जिला-स्तरीय गोदामों में दोहरे ताले तथा चाबी के नीचे रखे जाते हैं, जिनकी चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा करती है और चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी के ज़रिए निगरानी की जाती है। हर गतिविधि के लिए लॉगबुक में प्रविष्टियां दर्ज की जाती हैं।
सीईओ ने पुष्टि की कि गंजम ईवीएम गोदाम चालू महीने के दौरान नहीं खोला गया था और नियमित मासिक निरीक्षण भी अभी तक नहीं किया गया था। गंजम से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि हुई है कि हाल ही में गोदाम में कोई ट्र्रक न तो आया था और न ही बाहर निकला था।
राज्य के नुआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र, जिसमें 358 मतदान केंद्र हैं, के लिए प्रथम स्तरीय जांच के लिए कुल 720 ईवीएम (बैलेटिंग यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट) आवश्यक संख्या का 200 प्रतिशत है। यह व्यवस्था चुनाव अधिकारी की मांग के तहत की गयी थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया कि ये सभी मशीनें नुआपाड़ा जिले के मौजूदा स्टॉक से प्राप्त की गई थीं। पूरे उपचुनाव अवधि के दौरान किसी भी अन्य जिले से कोई ईवीएम न तो लाई गई और न ही भेजी गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बयान में आगे कहा गया है कि जिस राजनीतिक दल ने आरोप लगाया था उससे ट्रक का पंजीकरण नंबर या उसका स्थान जैसे सबूत देने को कहा गया था, लेकिन ऐसा कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।
विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि सभी ईवीएम और वीवीपैट रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के स्ट्रांग रूम में आरओ, पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कड़ी निगरानी में सीसीटीवी निगरानी तथा डबल-लॉक सुरक्षा के साथ रखे जाते हैं। वितरण केंद्र पर वीडियोग्राफी के तहत, चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मशीनें पीठासीन अधिकारियों को सौंप दी जाती हैं। प्रत्येक ईवीएम को विशिष्ट सीरियल नंबर वाली कागज की सील से सील किया जाता है जिसे सभी उम्मीदवारों के साथ साझा किया जाता है। मतदान एजेंटों को मतदान शुरू होने से पहले और मतगणना के दौरान इन सीरियल नंबरों को सत्यापित करने का अधिकार है, जिससे हर चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
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