भुवनेश्वर , मई 01 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संताली भाषा के लिए 'ओल चिकी' लिपि के आविष्कारक पंडित रघुनाथ मुर्मु को उनकी 121वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री माझी ने पंडित मुर्मु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने और संताली भाषा को एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।

श्री माझी ने कहा कि संताली के लिए 'ओल चिकी' लिपि का आविष्कार करके उन्होंने इतिहास रचा और अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने पंडित मुर्मु को संताली समुदाय की एक महान हस्ती बताते हुए उनकी विरासत पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने श्री मुर्मु के आदर्शों से प्रेरणा लेने और एक प्रगतिशील तथा समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का सभी से आग्रह किया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई, ओड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग की उप निदेशक देबयानी भुइयां और अनेक गणमान्य बुद्धिजीवी और समाजसेवी उपस्थित थे। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मु के योगदानों को याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने श्री मुर्मु को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "पंडित मुर्मु की जयंती के पवित्र अवसर पर हम पूजनीय 'गुरु गोमके' को अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। पंडित मुर्मु की 'ओल चिकी' लिपि के रूप में दूरदर्शी रचना ने संताली भाषा को उसकी विशिष्ट पहचान दी और कई पीढ़ियों को अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए सशक्त बनाया। उनका जीवन और उनके आदर्श हमें अपने समुदायों के सशक्तिकरण और उत्थान की दिशा में काम करने के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं।"बीजद ने एक बयान में कहा कि बैसाखी पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर हम गहरे सम्मान के साथ उनको नमन करते हैं और उनकी उल्लेखनीय विरासत को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।

उल्लेखनीय है कि 'ओल चिकी' लिपि के निर्माण में पंडित रघुनाथ मुर्मु का दृढ़ प्रयास एक युगांतकारी कदम है, जिसने संताली भाषा को एक लिखित रूप प्रदान करने के साथ-साथ उस समुदाय को एक विशिष्ट सांस्कृतिक और भाषाई पहचान भी दिलाई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित