कोलकाता , मार्च 06 -- उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में विसंगतियों को दूर करने में सहायता के लिये ओडिशा और झारखंड के लगभग 200 न्यायाधीश इस सप्ताह यहां पहुंचेंगे।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि ओडिशा और झारखंड से 100-100 न्यायाधीशों के सात मार्च को पश्चिम बंगाल पहुंचने की उम्मीद है। ये न्यायिक अधिकारी एसआईआर के तहत तैयार की गयी मतदाता सूची में तथ्यात्मक विसंगतियों से संबंधित मामलों की जांच और उनका निपटारा करेंगे।

राज्य में पहुंचने के बाद न्यायाधीश दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे और फिर नौ मार्च से अपना कार्यभार संभालेंगे। उनके काम शुरू करने के बाद, पूरे पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विसंगतियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए कुल 732 न्यायाधीश तैनात होंगे।

आयोग के सूत्रों के अनुसार, बाहर से आने वाले न्यायाधीशों के ठहरने की व्यवस्था कोलकाता के प्रमुख स्थानों जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, सियालदह रेलवे स्टेशन और हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास की गई है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कुछ न्यायाधीशों को वर्धमान, आसनसोल, खड़गपुर और सिलीगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में तैनात किया जाएगा।

मतदाता सूची की विसंगतियों को सुलझाने के मुद्दे पर राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद पर उच्चतम न्यायालय द्वारा असंतोष जताए जाने के बाद न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि इस मामले को न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से सुलझाया जाए।

न्यायालय के निर्देशानुसार, विसंगतियों के निपटारे का कार्य कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। न्यायालय ने इस कार्य के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की भी अनुमति दी है। इसी क्रम में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल ने न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से पहले राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।

उच्चतम न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि यदि आवश्यकता हुई तो अन्य राज्यों से भी अतिरिक्त न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं। इसके बाद ही ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों की मांग की गई। सूत्रों का कहना है कि काम का बोझ बढ़ने पर इन राज्यों से और भी न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं।

एसआईआर के तहत संशोधित मतदाता सूची का पहला चरण 28 फरवरी को प्रकाशित किया गया था। हालांकि, यह सूची अभी भी अधूरी है क्योंकि लगभग 60 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों को 'विचाराधीन' रखा गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण अब यह अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या इन मामलों का समय पर समाधान हो पाएगा और क्या वे मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।

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