जयपुर , जनवरी 15 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि दुनियाभर में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच भारतीय सेना की ऑपरेशन सिंदूर की संतुलित सैन्य कार्रवाई को इतिहास में भारत के साहस, शक्ति, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा। श्री सिंह ने गुरुवार को यहां 78वें सेना दिवस समारोह में सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि आतंकवादियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई मानवीय मूल्यों का पूर्ण ध्यान रखते हुए और सावधानीपूर्वक आकलन के साथ की गई।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादी यह कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारतीय सशस्त्र बल इतनी बहादुरी और तेजी से उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैनिकों के साहस ने ही दुश्मन को किसी भी तरह की शरारत करने से रोका। उन्होंने कहा, "परिस्थितियां कठिन थीं और दबाव भी था, लेकिन जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ हमारे सैनिकों ने इस अभियान को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आतंकवादी विचारधारा के पूर्ण उन्मूलन तक शांति के लिए भारत के प्रयास जारी रहेंगे।

श्री सिंह ने इस अभियान में स्वदेशी हथियारों के उपयोग को आत्मनिर्भरता की अनिवार्यता का प्रतीक बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता की दिशा में एक लंबा सफर तय कर चुका है और इसमें उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आने वाले समय में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, युद्ध के बदलते आयामों को देखते हुए त्रि-सेवा समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

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