(जयंत राय चौधरी से)काठमांडू , मार्च 08 -- रैपर से राजनेता बने बालेंद्र (बालेन) शाह के नेतृत्व वाली मध्यमार्गी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने रविवार को नेपाल के संसदीय चुनावों में प्रचंड जीत हासिल कर देश के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।

नेपाल चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने प्रत्यक्ष रूप से लड़ी गई 165 सीटों में से 119 पर जीत दर्ज की है और छह अन्य पर बढ़त बनाए हुए है। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद नई संसद में इस पार्टी का पूर्ण दबदबा होना तय है।

अधिकारियों ने बताया कि शेष परिणाम जल्द ही आने की उम्मीद है। 'नेपालखबर' के सलाहकार संपादक कुबेरा चालिसे ने कहा, "बालेन शाह के उदय और उनके साथ आने वाले युवा कैबिनेट से बहुत बड़ी उम्मीदें हैं, जिनके अगले सप्ताह शपथ लेने की संभावना है।"नेपाली कांग्रेस और दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के लगभग सभी शीर्ष नेता आरएसपी के उम्मीदवारों से चुनाव हार गए हैं। गौरतलब है कि आरएसपी का गठन महज चार साल पहले 2022 में हुआ था। हारने वाले प्रमुख नेताओं में अपदस्थ प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के केपी शर्मा ओली शामिल हैं, जिन्हें श्री शाह ने 50,000 से अधिक मतों से हराया।

यह जीत नेपाल के हालिया लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक है, जो भ्रष्टाचार और आर्थिक स्थिरता की कमी से त्रस्त जनता के गुस्से और युवाओं की नई राजनीतिक ताकत को दर्शाती है।

निचले सदन में कभी देश की सबसे प्रभावशाली पार्टी रही नेपाली कांग्रेस केवल 17 सीटें जीत सकी है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल -यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) ने सात-सात सीटें हासिल की हैं, जबकि श्रम संस्कृति पार्टी ने तीन सीटें जीती हैं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की है।

पिछले साल देश में हुए जेन-जी विद्रोह के बाद यह पहला चुनाव था। नेपाल के भावी प्रधानमंत्री बालेन शाह (35 ) संगीत की दुनिया से निकलकर एक स्थापित नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने इस चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था।

नेपाल के इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे एक बड़ा कारण वहां की जनसांख्यिकी है, देश की लगभग आधी आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। यह पीढ़ी भ्रष्टाचार और शासन की कमजोरी देख रही थी, जिसके कारण कई युवाओं को आजीविका के लिए विदेश जाने को मजबूर होना पड़ा।

समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (जिसमें 110 विधायक चुने जाते हैं) की मतगणना में भी आरएसपी का दबदबा दिखा है। अब तक गिने गए 45,30,913 मतों में से पार्टी को 22,39,870 मत मिले हैं, जो देश भर में पड़े कुल मतों का लगभग आधा है।

धनुषा-1 निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम अभी कानूनी पचड़े में फंसा हुआ है। क्रेडिट सूचना केंद्र की काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में नाम होने के कारण आरएसपी उम्मीदवार किशोरी साह 'कमल' की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी, जिस पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार है।

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