भुवनेश्वर , जनवरी 06 -- श्वसन चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में, फुलनाखरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) और एसयूएम हॉस्पिटल-2 की पल्मोनरी मेडिसिन टीम ने लंग कैंसर के एक मरीज पर सफलतापूर्वक पहली नेविगेशन-निर्देशित ब्रॉन्कोस्कोपिक क्रायोबायोप्सी की है।
यह नवाचारपूर्ण प्रक्रिया फेफड़े के कैंसर के शुरुआती निदान और पूर्ण उपचारात्मक प्रबंधन में एक बड़ा कदम है। यह प्रक्रिया गंजम जिले के दिगापहंडी के एक 57 वर्षीय पुरुष पर की गई। मरीज को दो महीने से दाहिनी छाती में दर्द, लगातार खांसी और सांस की तकलीफ हो रही थी।पूर्वी भारत की यह अपनी पहली इस तरह की प्रक्रिया है।
अन्य अस्पतालों में प्रारंभिक जांच में फेफड़े के दाहिने ऊपरी लोब में 3 सेमी का स्पिक्यूलेटेड मास पाया गया, जिससे फेफड़े के कैंसर की मजबूत आशंका हुई। घाव की परिधीय स्थिति और सटीक, न्यूनतम आक्रामक निदान तकनीक की आवश्यकता के कारण मरीज को आईएमएस और एसयूएम हॉस्पिटल-2 रेफर किया गया। उन्नत वर्चुअल नेविगेशन ब्रॉन्कोस्कोपी और क्रायोबायोप्सी के संयोजन से चिकित्सा टीम ने मुश्किल से पहुंच वाले फेफड़े के घाव तक सटीक पहुंच बनाई और उच्च गुणवत्ता वाले ऊतक नमूने प्राप्त किए, जिससे जटिल सर्जिकल बायोप्सी की आवश्यकता समाप्त हो गई।
यह प्रक्रिया डॉ. स्वदेश कुमार मोहंती के नेतृत्व में डॉ. प्रियदर्शिनी परिदा, डॉ. रचिता मोहंती, डॉ. सुर्जया शंकर मेहर और डॉ. जगन्नाथ ने की, जबकि एनेस्थीसियोलॉजी टीम का नेतृत्व डॉ. सुदीप महापात्र ने किया। हिस्टोपैथोलॉजिकल विश्लेषण से चार दिनों के अंदर फेफड़े के कैंसर की पुष्टि हो गई, जिससे त्वरित क्लिनिकल निर्णय संभव हुआ। मरीज को अब फेफड़े के हिस्से को पूर्ण रूप से सर्जिकल तरीक से हटाने के लिए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम को रेफर कर दिया गया है, जिससे शुरुआती पता लगने के कारण पूर्ण इलाज की मजबूत संभावना है।
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