अमृतसर , जनवरी 04 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने रविवार को आम आदमी पार्टी(आप) के नेता बलतेज पन्नू की ओर से पेश किए जा रहे गलत तथ्यों का कड़ा खंडन किया है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में, एसजीपीसी के सचिव प्रताप सिंह ने कहा कि पन्नू का यह दावा कि वार्षिक आम बैठक (सत्र) हर साल डिप्टी कमिश्नर की मंजूरी से होती है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत, एसजीपीसी के आम चुनावों के बाद, पहली बैठक में केवल अध्यक्ष पद का चुनाव डिप्टी कमिश्नर की देखरेख में होता है। इसके बाद, बैठक की कार्यवाही चुने हुए अध्यक्ष द्वारा संचालित की जाती है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि आम चुनावों के बाद पहली बैठक के बाद, एसजीपीसी की वार्षिक आम बैठकों की अध्यक्षता अधिनियम के अनुसार एसजीपीसी अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और इन बैठकों में डिप्टी कमिश्नर की कोई उपस्थिति या भूमिका नहीं होती है।
श्री प्रताप सिंह ने कहा कि बलतेज पन्नू सिख गुरुद्वारा अधिनियम के इस प्रावधान को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, जो गुमराह करने वाला है और सिख संगत के बीच भ्रम पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अगर बलतेज पन्नू ऐसे तकनीकी मामलों पर बोलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले सिख गुरुद्वारा अधिनियम को ठीक से पढ़ना और समझना चाहिए।
एसजीपीसी सचिव ने यह भी कहा कि पूर्व एसजीपीसी मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह के इस्तीफे की स्वीकृति को एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी से जोड़ना भी निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब डॉ. ईश्वर सिंह द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और उसके अनुसार कार्रवाई की गई, तो एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी एसजीपीसी के महासचिव के रूप में कार्यरत थे, न कि अध्यक्ष के रूप में। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिख संस्थानों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से पहले, तथ्यों को अच्छी तरह से सत्यापित करना आवश्यक है, न कि मनमाने बयान देना जो संगत के बीच भ्रम पैदा करते हैं।
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