लखनऊ , दिसम्बर 14 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने अपने 42वें स्थापना दिवस पर रविवार को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए पीजीआई में मल्टी ऑर्गन फेल्योर के लिये अत्याधुनिक क्वाटर्नरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अब समय आ गया है जब प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं टर्शियरी केयर से आगे बढ़कर चतुर्थिक यानी क्वाटर्नरी केयर की ओर बढ़ें। एसजीपीजीआई इस दिशा में देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल होने जा रहा है। प्रस्तावित सेंटर के लिए विस्तृत प्रस्तुति दी जा चुकी है और बजट की व्यवस्था पर कार्य प्रगति पर है। इस सेंटर में हाई-एंड मेडिकल तकनीक, मल्टी डिसिप्लिनरी विशेषज्ञों और अत्याधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम के जरिए सबसे जटिल मामलों का इलाज संभव होगा।

श्री पाठक ने बताया कि एसजीपीजीआई को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से स्पोक-हब मॉडल के तहत जोड़ा जा रहा है। इस मॉडल के जरिए मेडिकल कॉलेजों में भर्ती मरीजों को वहीं पीजीआई के विशेषज्ञों की सलाह और मार्गदर्शन मिलेगा। अब तक छह मेडिकल कॉलेज इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं और आने वाले समय में इसका विस्तार किया जाएगा। इससे गंभीर मरीजों को अनावश्यक रेफरल से राहत मिलेगी।

संस्थान में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग को भी सशक्त किया जा रहा है। वर्तमान में 40 बेड वाले इस विभाग को बढ़ाकर 100 बेड किया जा रहा है। वहीं, इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत करने के लिए बेड की संख्या दोगुनी किए जाने की तैयारी है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीजीआई पर जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में मरीज निजी अस्पतालों से रेफर होकर यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि मरीजों को उनकी बीमारी, जांच और इलाज की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। साथ ही डॉक्टरों के वेतन और सुविधाओं में सुधार आवश्यक है, जिससे योग्य चिकित्सकों का पलायन रोका जा सके।

नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने कहा कि मेडिकल शिक्षा को समाज की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है और क्लीनिकल प्रैक्टिस पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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