नयी दिल्ली , जनवरी 02 -- िल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) को 'वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त अकादमिक ब्रांड' बताते हुए कहा है कि इस महाविद्यालय का योगदान केवल रैंकिंग या प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है। इस संस्थान ने पीढ़ियों के विकास और राष्ट्र की प्रगति में प्रभावी भूमिका निभायी है।

वाणिज्य और अर्थशास्त्र शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में प्रो. सिंह ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय को उन अर्थशास्त्रियों, प्रशासकों, न्यायविदों और उद्योग जगत के नेताओं पर गर्व है, जिन्होंने एसआरसीसी से शिक्षा प्राप्त कर देश की विकास यात्रा में योगदान दिया।

भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि लगभग चार लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उभरना इस बात का संकेत है कि एसआरसीसी जैसे संस्थान विश्वस्तरीय अर्थशास्त्री, उद्यमी और नीति-निर्माता तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कॉलेज से उद्यमिता, बिज़नेस इनक्यूबेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल वित्त जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

नॉर्थ कैंपस में आयोजित सेंटेनरी कर्टन रेज़र कार्यक्रम के साथ यहां शताब्दी समारोहों का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर शिक्षा जगत, नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की व्यापक उपस्थिति रही।

एसआरसीसी के 100वें वर्ष (1926-2026) में प्रवेश के साथ, कार्यक्रम के दौरान संस्था की उस विरासत पर प्रकाश डाला गया, जो भारत की आर्थिक और प्रशासनिक संरचना के विकास के समानांतर आगे बढ़ती रही है। कर्टन रेज़र में पूरे वर्ष प्रस्तावित शैक्षणिक सम्मेलनों, नीति संवादों, पूर्व छात्र सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिनका उद्देश्य आने वाले समय की आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थान को सुदृढ़ करना है।

प्रो. सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ ही इस कार्यक्रम में एसआरसीसी शासी निकाय के अध्यक्ष अजय एस. श्रीराम भी मंच पर उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत दूरदर्शी उद्योगपति सर श्रीराम को पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी, जिन्होंने 1920 में 'द कमर्शियल स्कूल' के रूप में इस संस्था की स्थापना की थी।

इस अवसर पर टाइमलेस फ्रेम्स नामक स्मारक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया, जिसमें दरियागंज से लेकर वैश्विक पहचान तक एसआरसीसी की यात्रा को संकलित किया गया है।

श्री श्रीराम ने कहा कि कॉलेज का शताब्दी समारोह आत्ममूल्यांकन के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि दरियागंज में अपने सीमित आरंभ से लेकर देश के अग्रणी वाणिज्य संस्थान बनने तक एसआरसीसी की यात्रा संस्था की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के योगदान का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि एसआरसीसी की सबसे बड़ी ताकत उसके शिक्षक, मौजूदा एवं पूर्व विद्यार्थी, कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, बुनियादी ढांचे के विस्तार, एआई-सक्षम शिक्षण, उद्यमिता, समावेशन, स्थिरता और पूर्व छात्र सहभागिता पर विशेष ध्यान देगा।

कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सिमरत कौर ने अपने कहा कि शताब्दी समारोह पीढ़ियों से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों की साझा उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि एसआरसीसी ने सदैव उद्देश्य और नैतिकता को प्राथमिकता दी है और भविष्य में भी सामाजिक रूप से जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

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