Properties worth Rs 650 Cr restored to over 2,300 homebuyers in SRS Group caseनयी दिल्ली, 18 मार्च (वार्ता) गुरुग्राम की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे एसआरएस ग्रुप के खिलाफ 2,312 वास्तविक घर खरीददारों को 650 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियाँ वापस करने का आदेश दिया है।

वापस की गई संपत्तियों में एसआरएस ग्रुप के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में फ्लैट और प्लॉट शामिल हैं। इनमें एसआरएस सिटी, एसआरएस पर्ल फ्लोर, एसआरएस पर्ल टॉवर, एसआरएस रेजीडेंसी, एसआरएस रॉयल हिल्स, एसआरएस प्राइम फ्लोर, एसआरएस पर्ल यूनिटी, एसआरएस अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट, एसआरएस पर्ल हाइट और एसआरएस रिट्रीट फार्म्स आदि शामिल हैं।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी, जो फरीदाबाद और दिल्ली के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज 81 प्राथमिकी तथा सीबीआई द्वारा दर्ज मामलों पर आधारित है।

एसआरएस ग्रुप पर आरोप है कि उसने निवेशकों और बैंकों के साथ लगभग 2,200 करोड़ रुपये की ठगी की है। यह ग्रुप रियल एस्टेट और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में काम करता था। इसके प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, ठगी और आपराधिक विश्वासघात जैसे अपराधों का आरोप है, जिसमें घर खरीददारों, प्लॉट खरीददारों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के फंड को गलत तरीके से डायवर्ट और हड़प लिया गया।

ईडी की जांच के अनुसार, आरोपी एसआरएस ग्रुप की कंपनियों ने निवेशकों को रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में उच्च रिटर्न का लालच देकर फंसाया। निवेशकों से एकत्रित धन को ग्रुप द्वारा बनाई गई सैकड़ों शेल कंपनियों के माध्यम से रूट किया गया और फिर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। ईडी ने पहले इस मामले में 2,215.98 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं और गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने 2022 में चार्जशीट पर संज्ञान लिया और आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।

यह नवीनतम फैसला अन्य वास्तविक घर खरीददारों तथा वैध दावेदारों (जिनमें बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल हैं) को अटैच की गई बाकी संपत्तियों की बहाली का रास्ता साफ करता है। यह निवेशकों को धोखाधड़ी से प्रभावित होने वालों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले मामले में तीन आरोपियों प्रवीण कुमार कपूर, सुनील जिंदल और जितेंद्र गर्ग को विशेष अदालत ने फरार घोषित किया था और इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया गया था।

इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर प्रवीण कुमार कपूर को 2025 में अमेरिका के न्यूयॉर्क (नेवार्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे) पर प्रवेश से रोक दिया गया और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत डिपोर्ट कर दिया गया। वह फिलहाल फरीदाबाद के नीमका जेल में बंद है।

इसके अलावा, अदालत ने जनवरी इस साल सुनील जिंदल और जितेंद्र गर्ग को आर्थिक भगौडा घोषित किया था।

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