भोपाल , जनवरी 21 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के पश्चात सामने आई कथित विसंगतियों को लेकर निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है।

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में कहा कि एसआईआर के तहत प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम तथाकथित विसंगति सूचियों में शामिल कर दिए गए हैं। इन विसंगतियों में छह से अधिक संतानों का उल्लेख, पिता के नाम में असंगति, माता-पिता एवं मतदाता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर और दादा/नाना एवं मतदाता की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर जैसी प्रविष्टियाँ शामिल हैं।

श्री सिंघार ने स्पष्ट किया कि ये सभी विसंगतियाँ पूरी तरह डेटा-आधारित और प्रणाली द्वारा स्वतः उत्पन्न संकेत हैं, जिनका उद्देश्य केवल सत्यापन को चिन्हित करना है, न कि मतदाता की पात्रता पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना। किंतु इन विसंगतियों का पैमाना इतना व्यापक है कि लाखों मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में भय, भ्रम और मानसिक दबाव की स्थिति बन गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार विसंगति मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की जिम्मेदारी है कि वे विधिवत नोटिस की सेवा, स्थल पर भौतिक सत्यापन और सुनवाई के अवसर के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन जमीनी स्तर से प्राप्त सूचनाएँ बताती हैं कि नोटिस वितरण और सत्यापन की प्रक्रिया बेहद धीमी है, कई बीएलओ और जिला स्तर के अधिकारी प्रक्रिया को लेकर स्वयं स्पष्ट नहीं हैं और अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। इससे कई मामलों में मतदाताओं में नाम विलोपन का भय और अधिक गहरा गया है।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और बीएलओ को लिखित रूप में स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि एसआईआर के अंतर्गत प्रणालीगत विसंगतियाँ केवल सत्यापन संकेत हैं, इनके आधार पर स्वतः दस्तावेज मांगना या नाम विलोपित करना उचित नहीं है।

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