जगदलपुर , नवम्बर 11 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को केन्द्र एवं राज्य सरकारों पर निशाने साधते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से हजारों ग्रामीणों के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा मंडरा रहा है।

श्री बघेल आज यहां पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इसे ''सरकार की जल्दबाजी और प्रशासनिक असंवेदनशीलता'' बताया, जिसने आदिवासी समुदाय के बीच भय का वातावरण पैदा कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ग्रामीणों से ऐसे दस्तावेज मांग रहा है जो अधिकांश बस्तरवासी प्रस्तुत नहीं कर सकते। उन्होंने कहा ''सरकार ने यह प्रक्रिया बिना किसी सर्वदलीय चर्चा या व्यापक जनसुनवाई के शुरू कर दी। यह बस्तर के लोगों के अस्तित्व और अधिकारों पर सीधा हमला है। जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके नाम काटे जा रहे हैं यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे राजनीतिक मंशा छिपी है, जिससे आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को योजनाओं और अधिकारों से वंचित किया जा सके।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट को लेकर केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राजधानी में इतनी बड़ी घटना गृह मंत्री की ''नाक के नीचे'' हो गई, जो गंभीर सुरक्षा चूक है। श्री बघेल ने कहा ''अमित शाह की पूरी मशीनरी विपक्षी नेताओं की निगरानी में लगी है, जबकि राजधानी की सुरक्षा भगवान भरोसे है। अगर उन्हें केवल चुनाव प्रचार में दिलचस्पी है, तो गृह मंत्रालय छोड़ देना चाहिए।''पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि केंद्र सरकार इस घटना की जिम्मेदारी तय करे और देश की आंतरिक सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखे। उन्होंने कहा कि जब शासन सत्ता की सुरक्षा में व्यस्त हो जाए और जनता की सुरक्षा को भूल जाए, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।

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