रायपुर , नवंबर 16 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के दावों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि आयोग द्वारा मतदाताओं तक प्रपत्र वितरण के संबंध में किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। पार्टी का कहना है कि आयोग द्वारा आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर मतदाता अब भी प्रपत्रों से वंचित हैं।
प्रदेश कांग्रेस की ओर से विज्ञप्ति जारी करके जानकारी दी गई कि निर्वाचन आयोग की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि बीएलओ अब तक 80 प्रतिशत मतदाताओं तक प्रपत्र पहुंचा चुके हैं, लेकिन वास्तविकता में अभी 25 प्रतिशत मतदाताओं तक भी फॉर्म नहीं पहुंचे हैं।"प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि बीएलओ कई क्षेत्रों में घर-घर पहुंचने के बजाय मोहल्लों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बैठकर फॉर्म वितरित कर रहे हैं जिससे बड़ी संख्या में लोग इससे वंचित रह गए हैं।
श्री बैज ने यह भी कहा कि आयोग द्वारा सफेद बैकग्राउंड में पासपोर्ट साइज फोटो जमा कराने की अनिवार्यता ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी का कारण बन रही है। उनके अनुसार, "ग्रामीण क्षेत्रों में सफेद पृष्ठभूमि में फोटो खिंचवाना आसान नहीं है, इसलिए आयोग को स्वयं फोटो खींचने की व्यवस्था करनी चाहिए।"कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि बीएलओ जब किसी मतदाता के घर पहुंचे, तो वहां से एक पुष्टि प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मतदाता तक वास्तव में फॉर्म पहुंचा है। बैज ने कहा कि आयोग इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दे पाया है।
उन्होंने दस्तावेज जमा करने और सत्यापन की एक माह की समय सीमा को भी अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि वर्तमान में राज्य में धान कटाई और उपार्जन का दौर चल रहा है, ऐसे में किसानों और ग्रामीणों के लिए निर्धारित समय पर दस्तावेज जमा करना कठिन है। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां अगला चुनाव अभी तीन साल दूर है, समय सीमा को बढ़ाकर कम से कम तीन महीने किया जाए।
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