चेन्नई , नवंबर 2 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के अधीन काम करने का आरोप लगाते हुए आयोग से तमिलनाडु में 4 नवंबर से शुरू होने वाले प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने की मांग की।
श्री स्टालिन की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव में कहा गया कि अगर चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को नहीं रोकता है, तो तमिलनाडु के पास देश की शीर्ष अदालत में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। श्री स्टालिन ने एसआईआर को लोगों के मताधिकार छीनने वाली प्रक्रिया कहा।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया की घोषणा ऐसे समय में की है जब तमिलनाडु में 2026 के अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। बैठक में आरोप लगाया गया कि इसका उद्देश्य भाजपा और उसकी गठबंधन सहयोगी अन्नाद्रमुक को लाभ पहुंचाना और मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना है।
इसमें बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में लंबित एक ऐसी ही याचिका का भी उल्लेख किया गया है, जहां 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। एसआईआर के प्रति अपने कड़े विरोध को दोहराते हुए सर्वदलीय बैठक इस प्रक्रिया का विरोध करने हेतु एक सामूहिक रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी क्योंकि उनके अनुसार चुनाव आयोग की कार्रवाई न केवल विवादास्पद है बल्कि संदिग्ध और एकतरफा भी है।
प्रस्ताव में कहा गया कि एसआईआर की आड़ में तमिलनाडु के लोगों के मताधिकार को छीनने की साजिश रची जा रही है। बिहार में मुसलमानों, दलितों और महिलाओं को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए। तमिलनाडु ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लोकतंत्र और उसकी गरिमा को नष्ट करने तथा अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वैधानिक संस्थाओं को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का आधार है।
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